भारतकोश
श्रीमद्भगवद्गीता साधक-संजीवनी (परिशिष्टसहित)

श्रीमद्भगवद्गीता साधक-संजीवनी (परिशिष्टसहित)

Shrimad Bhagavad Gita Sadhak Sanjeevani

स्वामी रामसुखदास द्वारा

स्रोत: संवर्धित नब्बेवाँ संस्करण (90th Edition), गीता प्रेस गोरखपुर · गीताप्रेस, गोरखपुर · 2008 (उद्गम)

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[ ४ ]

॥ ॐ श्रीपरमात्मने नमः ॥

कृष्णां वन्दे जगदगुरुम्

पराकृतनमद्वन्धं परं ब्रह्म नराकृति। सौन्दर्यसारसर्वस्वं वन्दे नन्दात्मजं महः ॥ प्रपन्नपारिजाताय तोत्रवेत्रैकपाणये। ज्ञानमुद्राय कृष्णाय गीतामृतदुहे नमः ॥ वसुदेवसुतं देवं कंसचाणूरमर्दनम्। देवकीपरमानन्दं कृष्णां वन्दे जगदगुरुम् ॥

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वंशीविभूषितकरान्नवनीरदाभात् पीताम्बरादरुणविम्बफलधरोष्ठात् । पूर्णन्दुसुन्दरमुखारविन्दनेत्रात् कृष्णात् परं किमपि तत्त्वमहं न जाने ॥

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भीष्मद्रोणतटा जयद्रथजला गान्धारनीलोत्पला शल्यग्राहवती कृपेण वहनी कर्णेन वेलाकुला। अश्वत्थामविकर्णघोरमकरा दुर्घोषनावर्तिनी सोत्तीर्णा खलु पाण्डवै रणनदी कैवर्तकः केशवः ॥

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एकं शास्त्रं देवकीपुत्रगीतमेको देवो देवकीपुत्र एव। एको मन्त्रस्तस्य नामानि यानि कर्माप्येकं तस्य देवस्य सेवा ॥

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