भारतकोश
साहित्यदर्पण (आचार्य विश्वनाथ - वाक्यं रसात्मकं काव्यम् सटीक)

साहित्यदर्पण (आचार्य विश्वनाथ - वाक्यं रसात्मकं काव्यम् सटीक)

Sahityadarpana of Vishwanatha with Hindi Commentary

कविरत्न आचार्य विश्वनाथ / पं. शालिग्राम शास्त्री द्वारा

DevanagariSanskritpublished506 पृष्ठ

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३ पृष्ठस्य पङ्क्तौ | पृष्ठस्य पङ्क्तौ दैन्यम् ... १४७ १२ | भावपदनिरुक्तिः .. १६७ ६ श्रमः ... १४८ ७ | रसभेदाः ... ... १६८ ५ मदः ... १४८ १४ | तत्र, शृङ्गारः... ... १६९ २ जडता ... १४९ ७ | विप्रलम्भ } .. १६९ १५ उग्रता ... १५० ३ | सम्भोग } मोह ... १५० ११ | विप्रलम्भस्वरूपम् १७० २ विबोधः ... १५१ ३ | विप्रलम्भभेदाः ... १७० ४ स्वप्नः ... १५१ ११ | तत्र, पूर्वराग १७० ६ अपस्मार ... १५२ ८ | कामदशाः ... १७१ ४ गर्वः ... १५२ १३ | तत्र, मरणे विशेष .. १७३ २ मरणम् ... १५३ २ | कामदशासु विशेषः १७४ ६ आलस्यम्... १५३ ७ | पूर्वरागभेदः ... १७४ ९ अमर्ष ... १५४ ५ | मान } ... .. १७४ १६ निद्रा ... १५४ ११ | कोपः } अवहित्था ... १५५ २ | ईर्ष्यामान ... १७६ ८ औत्सुक्यम् ... १५५ ८ | मानभङ्गोपायाः ... १७७ ७ उन्माद ... १५६ २ | प्रवासः ... १७७ १६ शङ्का ... १५७ २ | दश कामदशाः ... १७८ ४ स्मृति ... १५७ १० | प्रवासभेदा ... १७८ १७ मतिः ... १५८ २ | करुणविप्रलम्भ ... १८० ८ व्याधि ... १५८ ८ | सम्भोग ... १८१ ६ त्रास ... १५८ १२ | सम्भोगभेदा .. १८२ ४ व्रीडा ... १५९ ५ | एवम् ... ... १८३ ३ हर्ष ... १५९ ८ | हास्यभेदा ... १८४ ८ असूया ... १६० ५ | हास्य ... १८४ १० विषाद ... १६० ११ | करुणविप्रलम्भस्वरूपम् मे- धृति ... १६१ ६ | दारदाणम् .. १८५ १३ चपलता ... १६१ १२ | रौद्रः .. ... १८६ २ ग्लानि ... १६२ ८ | रौद्ररसस्वरूप भेदाः... चिन्ता ... १६३ ८ | वीरः ... ... १८७ ४ औत्सुक्य ... १६३ ७ | दानवीर अमर्ष ... १६४ ५ | धर्मवीर हर्ष ... १६४ ८ | युद्धवीरः } ... ... १८७ १८ मद ... १६५ ७ | दयावीरः विबोध ... १६६ ७