भारतकोश
समझ से प्राप्त ब्रह्मचर्य

समझ से प्राप्त ब्रह्मचर्य

Samaj Se Prapt Brahmacharya

दादा भगवान द्वारा

स्रोत: दादा भगवान आराधना ट्रस्ट, 'दादा दर्शन', उस्मानपुरा, अहमदाबाद · दादा भगवान आराधना ट्रस्ट · 2005 (उद्गम)

DevanagariHindipublished482 पृष्ठ

पृष्ठ 152, कुल 482 में से

संदर्भ में पढ़ें
पृष्ठ 152

दृष्टि उखड़े, 'श्री विज्ञन' से (खं-2-२)

९९

चीज़ पर विषय कैसे उत्पन्न हो सकता है? अरुचि पर विषय कैसे उत्पन्न होगा? किसी स्त्री का हाथ जल गया हो, रोज पूरे शरीर को पुरुष छूता हो, लेकिन हाथ जल जाए और छाले पड़ गए हों और फिर पीप निकल रहा हो, उस समय वह स्त्री कहे कि 'यहाँ ये जरा धो दीजिए न।' तो क्या कहेगा?

प्रश्नकर्ता : मना कर देगा।

दादाश्री : अब उसमें रुचि थी, तो वहाँ ऐसा देखकर अरुचि हो जाती है न! फिर वापस रुचि उत्पन्न नहीं होनी चाहिए। लेकिन स्टैबिलाइज़ रहना चाहिए। यह तो यों फिर से ठीक हो जाए तो, जैसे थे वैसे के वैसे ही हो जाते हैं, क्या ऐसा नहीं है? स्टैबिलाइज़ हो जाना चाहिए।

प्रश्नकर्ता : स्टैबिलाइज़ किस प्रकार से हो सकते हैं?

दादाश्री : वह तो यहाँ, इस रोड पर जाकर पूछ आना न! जैसा वे लोग करते हैं वैसे ही तू भी करना! कंकर-मेटल डालकर वहाँ पर रोलर घुमाते हैं और वह स्टैबिलाइज़ हो जाता है। वह देख लेना।

प्रश्नकर्ता : लेकिन कौन सा रोलर घुमाना चाहिए?

दादाश्री : वह तो उस रोलर से हमें पश्चाताप कर करके, दोष को निकालना है।

प्रश्नकर्ता : इस ज्ञान की प्राप्ति के बाद खुद का निश्चय है, ध्येय है, उसके बावजूद भी जो रुचि रही हुई है, उस रुचि को तोड़ने के लिए, उसका छेदन करने के लिए क्या करना चाहिए?

दादाश्री : एकजोक्ट प्रतिक्रमण करेगा तब हो पाएगा। अरुचि देखने के अन्य सभी साधन उसके अंदर हैं, अरुचि देखने के। वह सब हेलप करता रहेगा।

समझ से प्राप्त ब्रह्मचर्य · पृष्ठ 152, कुल 482 में से · BharatKosha