समझ से प्राप्त ब्रह्मचर्य
Samaj Se Prapt Brahmacharya
दादा भगवान द्वारा
स्रोत: दादा भगवान आराधना ट्रस्ट, 'दादा दर्शन', उस्मानपुरा, अहमदाबाद · दादा भगवान आराधना ट्रस्ट · 2005 (उद्गम)
पृष्ठ 244, कुल 482 में से
संदर्भ में पढ़ेंपछतावे सहित प्रतिक्रमण (खं-2-७)
१९१
करना चाहिए? तुरंत ही एक घंटे तक दादा से माँग करना कि, 'दादा, मुझे ब्रह्मचर्य की शक्ति दीजिए।' ताकि शक्ति मिल जाए और प्रतिक्रमण भी हो जाएँ। फिर दिमाग में उसकी 'वरीज' (चिंता) मत रखना। गड़ढे में गिरे तो तुरंत ही सामायिक करके धो देना। सामायिक यानी हाथ-पैर धोकर, कपड़े धो-कर, सूखाकर और समेटकर साफ-सुथरे हो जाना। तुरंत सामायिक नहीं हो सके तो दो-चार घंटों बाद भी कर लेना, लेकिन लक्ष्य में रखना है कि सामायिक करनी बाकी है।
भगवान ने ऐसा नहीं कहा है कि, 'तू गड़ढे में मत गिरना।' भगवान ने तो ऐसा कहा है कि, 'गड़ढे में गिरने जैसा नहीं है, सीधे रास्ते पर चलने जैसा है।' ऐसा अभिप्राय दिया था। फिर कोई कहेगा कि, 'आपने मना किया है और मैं गिर गया तो क्या करूँ?' तब भगवान कहते हैं, 'गिर गए तो उसमें हर्ज नहीं है, अगर गिर जाए तो तू धो देना और अभी इस्त्रीवाले कपड़े पहन ले।' एक घंटा सामायिक कर ली तो फिर कोई रूकावट नहीं रहेगी। किंचितमात्र भी रूकावट रहे तो मेरी जिम्मेदारी, फिर इतने छोटे गड़ढे में गिरे या बड़े गड़ढे में गिरे, लेकिन ढूबेगा नहीं!!! पूरा जगत् बिना गड़ढे के ढूब रहा है, ढक्कन तक में ढूब जाते हैं!
❖
❖
❖
❖
❖