समझ से प्राप्त ब्रह्मचर्य
Samaj Se Prapt Brahmacharya
दादा भगवान द्वारा
स्रोत: दादा भगवान आराधना ट्रस्ट, 'दादा दर्शन', उस्मानपुरा, अहमदाबाद · दादा भगवान आराधना ट्रस्ट · 2005 (उद्गम)
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संदर्भ में पढ़ेंस्पर्श सुख की भ्रामक मान्यता (खं-2-८)
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थप्पड़ मार देता है? ! तब क्या करता है? 'क्या समझता है?' कहकर एक लगा देना।
विषय रमणता की हो तो प्रतिक्रमण करके उसे धो देना। बाद में दांत-बांत तोड़ दें तो क्या दिखेगा, ऐसा सब देखना चाहिए। श्री विजन तो कहलाएगा न।
प्रश्नकर्ता : लेकिन श्री विजन देखने के बावजूद भी वह बार-बार याद आता है।
दादाश्री : यह याद, वह तो मन का काम है, तेरा क्या जाता है? तुझे 'देखते' ही रहना है।
प्रश्नकर्ता : तो इस पर से ऐसा लगता है कि अभी तक वह टूटा नहीं है।
दादाश्री : टूटेगा कैसे लेकिन? वह तो उसका सारा जोर निकल जाएगा, तब अलग होगा। तब तक जितना जोर भरा हुआ है, उसे हमें देखते ही रहना है।
प्रश्नकर्ता : लंबे समय तक विचार आईं तो उनमें तन्मयाकार हो जाते हैं।
दादाश्री : विचार तो आईंगे, वह तो, जितना लंबा है उतने विचार आते ही रहेंगे। उनका हिसाब खत्म हो जाएगा तो मन बंद हो जाएगा, वह फिर दूसरा पकड़ लेगा।
प्रश्नकर्ता : लेकिन वह हिसाब कब पूरा होगा?
दादाश्री : अभी तो बहुत सारा है। बेहिसाब। अभी तो कोई हिसाब ही नहीं है। अभी तो इस पहाड़ का पहला पत्थर हटा है। लेकिन जो यहाँ से तुरंत काट दे, उसके लिए फिर कुछ खास नहीं रहेगा। दिखाई दे, तभी से प्रतिक्रमण करे और फिर किसी रमणता में नहीं पड़े, रात को, कहीं भी। जरा सा भी उसका विचार