समझ से प्राप्त ब्रह्मचर्य
Samaj Se Prapt Brahmacharya
दादा भगवान द्वारा
स्रोत: दादा भगवान आराधना ट्रस्ट, 'दादा दर्शन', उस्मानपुरा, अहमदाबाद · दादा भगवान आराधना ट्रस्ट · 2005 (उद्गम)
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संदर्भ में पढ़ेंसमर्पण
विकराल विषयागिन में दिन-रात जलते; अरे रे! अवदशा फिर भी उसी में विचरते!
संसार के परिभ्रमण को सहर्ष स्वीकारते; और परिणाम स्वरूप दुःख अनंत भुगतते!
दावा क्रारी, मिश्रचेतन-संग चुकाते; अनंत आत्मसुख को विषय भोग से विमुखते!
विषय अज्ञान टले, ज्ञानी से 'ज्ञान' मिलते ही; 'दृष्टि' निर्मलता की कुंजियाँ मिलते ही!
'मोक्षगामी' के लिए - ब्रह्मचारी या विवाहित; शील की समझ से मोक्ष पद करवाते प्राप्त!
अहो! निर्ग्रंथज्ञानी की वाणी की अद्भुतता; अनुभवी वचन निर्ग्रंथ पद तक पहुँचाता!
मोक्ष पथ पर विचरते 'शील पद' की भावना करते; वीतराग चारित्र के बीज-अंकुर विकसित करते!
अहो! ब्रह्मचर्य की साधना के लिए निकली; आंतर बाह्य उलझनों के सत् हल बताती!
ज्ञान वाणी का यह संकलन, 'समझ ब्रह्मचर्य' की है देता; आत्मकल्याणार्थ 'यह', महाग्रंथ जगचरण समर्पिता!