भारतकोश
सामवेद संहिता (सरल हिन्दी भावार्थ सहित)

सामवेद संहिता (सरल हिन्दी भावार्थ सहित)

Samaveda Samhita with Hindi Translation

डा. रेखा व्यास द्वारा

स्रोत: संस्कृत साहित्य प्रकाशन · संस्कृत साहित्य प्रकाशन (उद्गम)

DevanagariSanskritpublished310 पृष्ठ

पृष्ठ 120, कुल 310 में से

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पृष्ठ 120

इमं वृषणं कृणुतैकमिन्माम्.. (६) हे देवताओ! आप इस सोम को बलवान बनाइए, ताकि वे हमारी मनोकामनाएं पूरी कर सकें. हमें बलवान बना सकें. (६) स न इन्द्राय यज्यवे मरुद्भ्यः वरिवोवित्परिस्रव.. (७) हे सोम! आप धनदाता व पूजनीय हैं. आप इंद्र, मरुद्गण और वरुण के लिए धारा के रूप में टपकिए. (७) एना विश्वान्यर्य आ द्युम्नानि मानुषाणाम्. सिषासन्तो वनामहे.. (८) सोम की कृपा से मनुष्यों के लिए चाहे गए सभी प्रकार के धन हमें प्राप्त हों. हम उन धनों के श्रेष्ठ उपयोग की इच्छा रखते हैं. (८) अहमस्मि प्रथमजा ऋतस्य पूर्वं देवेभ्यो अमृतस्य नाम. यो मा ददाति स इदेवमावदहमन्नमन्नमदन्तमद्मि.. (९) मैं (अन्न) सभी देवताओं से पहले उत्पन्न हुआ हूं. मैं विनाशरहित हूं. जो व्यक्ति अच्छे पात्र को मेरा दान करता है, वह सब का कल्याण करता है. जो किसी को दान नहीं करता है, अकेला ही अन्न खाता है, उसे मैं समाप्त कर देता हूं. (९) दूसरा खंड त्वमेतदधारयः कृष्णासु रोहिणीषु च. परुष्णीषु रुशत्पयः.. (१) हे इंद्र! काली, लाल और अनेक रंग वाली गायों में (सब में) आप ने एक जैसा चमचमाता सफेद दूध स्थापित किया है. हम आप के इस आश्चर्यजनक सामर्थ्य की प्रशंसा करते हैं. (१) अरूरुचदुषसः पृश्निरग्रिय उक्षा मिमेति भुवनेषु वाजयुः. मायाविनो ममिरे अस्य मायया नृचक्षसः पितरो गर्भमादधुः.. (२) उषा के संबंधी सूर्य खास हैं. वे स्वयं प्रकाशमान और सब को प्रकाशित करने वाले हैं. वे ही जल बरसाने वाले मेघ का रूप भी हैं. वे ही आकाश में गर्जना करते हैं. बुद्धिमान देवताओं ने बुद्धि से इस जग को रचा. मनुष्यों को देखने वाले पितरों ने माता के पेट (गर्भ) में इसे स्थापित किया. (२) इन्द्र इद्धर्योः सचा सम्मिश्ल आ वचोयुजा. इन्द्रो वज्री हिरण्ययः.. (३) इंद्र के संकेत (इशारे) मात्र से घोड़े एक साथ रथ में जुत जाते हैं. इंद्र वज्रधारी व आभूषणधारी हैं. (३) ebook converter DEMO Watermarks*