सामवेद संहिता (सरल हिन्दी भावार्थ सहित)
Samaveda Samhita with Hindi Translation
डा. रेखा व्यास द्वारा
स्रोत: संस्कृत साहित्य प्रकाशन · संस्कृत साहित्य प्रकाशन (उद्गम)
पृष्ठ 137, कुल 310 में से
संदर्भ में पढ़ेंदूसरा अध्याय पहला खंड पान्तमा वो अन्धस इन्द्रमभि प्र गायत. विश्वासाहं १३ शतक्रतुं म १३ हिष्ठं चर्षणीनाम्.. (१) हे यजमानो! आप इंद्र की स्तुति कीजिए. वे आप के द्वारा चढ़ाए गए सोमरूपी अन्न को पीने वाले तथा शत्रुओं का नाश करने वाले हैं. वे सैकड़ों प्रकार के कर्म करने वाले व मनुष्यों को धन देने वाले हैं. (१) पुरुहूतं पुरुष्टुतं गाथान्या ३ १३ सनश्रुतम्. इन्द्र इति ब्रवीतन.. (२) हे यजमानो! आप इंद्र की उपासना कीजिए. वे बहुत प्रसिद्ध हैं. वे यज्ञ में अनेक लोगों द्वारा बुलाए जाते हैं. अनेक लोगों द्वारा उन की उपासना की जाती है. (२) इन्द्र इन्नो महोनां दाता वाजानां नृतुः. महाँ अभिज्ञा यमत्.. (३) हे यजमानो! इंद्र अन्न और धन देने वाले हैं. वे महान देव हैं. वे हमारे सामने प्रकट हो कर हमें अन्नधन आदि देने की कृपा करें. (३) प्र व इन्द्राय मादन १३ हर्यश्वाय गायत. सखायः सोमपाव्ने.. (४) हे यजमानो! इंद्र हरि नाम के घोड़े वाले हैं. वे सोमरस पीने वाले हैं. आप उन इंद्र के लिए मादक स्तोत्र गाइए. (४) श १३ सेदुक्थ १३ सुदानव उत द्युक्षं यथा नरः. यकृमा सत्यराधसे.. (५) हे यजमानो! इंद्र श्रेष्ठ धनदाता और सत्यरूपी धन वाले हैं. हम विधिविधान सहित इंद्र की स्तुति करते हैं. आप भी उन की स्तुति कीजिए. (५) त्वं इन इन्द्र वाजयूस्त्वं गव्युः शतक्रतो. त्व १३ हिरण्ययुर्वसो.. (६) हे इंद्र! आप सैकड़ों प्रकार के कर्म करने वाले हैं. आप हमें अन्न, गाएं व सोना दीजिए. (६) वयमु त्वा तदिदर्था इन्द्र त्वायन्तः सखायः. कण्वा उक्थेभिर्जरन्ते.. (७) हे इंद्र! हम आप को अपना बनाना चाहते हैं. हम मित्र भाव से आप की उपासना करते ebook converter DEMO Watermarks*