भारतकोश
सामवेद संहिता (सरल हिन्दी भावार्थ सहित)

सामवेद संहिता (सरल हिन्दी भावार्थ सहित)

Samaveda Samhita with Hindi Translation

डा. रेखा व्यास द्वारा

स्रोत: संस्कृत साहित्य प्रकाशन · संस्कृत साहित्य प्रकाशन (उद्गम)

DevanagariSanskritpublished310 पृष्ठ

पृष्ठ 146, कुल 310 में से

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पृष्ठ 146

तीसरा अध्याय पहला खंड पवस्व वाचो अग्रियः सोम चित्राभिरूतिभिः. अभि विश्वानि काव्या.. (१) हे सोम! आप प्रमुख हैं, आगे की पंक्ति में रहने वाले हैं. आप हमारी स्तुतियों पर ध्यान दीजिए. हमारी सभी स्तुतियों और प्रार्थनाओं को सुनिए. आप पूजनीय व संरक्षणशील हैं. (१) त्व ꣳ समुद्रिया अपो ऽ ग्रियो वाच ईरयन्. पवस्व विश्वचर्षणे.. (२) हे सोम! आप सभी के कर्मों को ध्यान से देखने वाले हैं. आप अग्रगण्य स्तुतियों के प्रेरक हैं. अंतरिक्ष के जल आप को प्राप्त होते हैं. (२) तुभ्येमा भुवना कवे महिम्ने सोम तस्थिरे. तुभ्यं धावन्ति धेनवः.. (३) हे सोम! आप के ही लिए ये लोक स्थिर हैं. आप की महानता के कारण ये लोक स्थिर हैं. गाएं आप को दूध देने के लिए दौड़दौड़ कर आप के पास आ रही हैं. (३) पवस्वेन्दो वृषा सुतः कृधी नो यशसो जने. विश्वा अप द्विषो जहि.. (४) छाना हुआ आप का रस स्फूर्तिदायी है. आप छनते हुए अपनी धाराओं से पवित्र होइए. हम लोगों को यशस्वी बनाइए. हमारे सभी शत्रुओं का नाश कीजिए. (४) यस्य ते सख्ये वय ꣳ सासह्वाम पृतन्यतः. तवेन्दो द्युम्न उत्तमे.. (५) हे सोम! हम आप के मित्र हैं. हम ने आप से तेजस्विता पाई है. हम सभी शत्रुओं को नष्ट करने की क्षमता वाले हो गए हैं. (५) या ते भीमान्यायुधा तिग्मानि सन्ति धूर्वणे. रक्षा समस्य नो निदः.. (६) हे सोम! आप के अस्त्रशस्त्र भयंकर हैं. वे शत्रुओं को डरा देने वाले हैं. उन की सहायता से शत्रुओं द्वारा की गई निंदा की पीड़ा से हमारी रक्षा कीजिए. (६) वृषा सोम द्युमाँ असि वृषा देव वृषव्रतः. वृषा धर्माणि दध्रिषे.. (७) हे सोम! आप शक्तिमान, प्रकाशमान, इच्छापूरक एवं बल बढ़ाने के लिए संकल्पशील हैं. हे इच्छापूरक! आप देवता और मनुष्य सब के लिए कल्याणकारी कर्म धारण करने वाले ebook converter DEMO Watermarks*

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