भारतकोश
सामवेद संहिता (सरल हिन्दी भावार्थ सहित)

सामवेद संहिता (सरल हिन्दी भावार्थ सहित)

Samaveda Samhita with Hindi Translation

डा. रेखा व्यास द्वारा

स्रोत: संस्कृत साहित्य प्रकाशन · संस्कृत साहित्य प्रकाशन (उद्गम)

DevanagariSanskritpublished310 पृष्ठ

पृष्ठ 148, कुल 310 में से

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पृष्ठ 148

कराने वाले व देवों को हवि पहुंचाने वाले हैं. हम आप की उपासना करते हैं. (१) अग्निमग्निं ꣳ हवीमभिः सदा हवन्त विश्पतिम्. हव्यवाहं पुरुप्रियम्.. (२) हे अग्नि! आप प्रजापालक, हविवाहक, सर्वप्रिय, बुलाने योग्य व अनेक नाम वाले हैं. आप हम सब के नेता हैं. हम मंत्रों से आप का आह्वान करते हैं. (२) अग्ने देवाँ इहा वह जज्ञानो वृक्तबर्हिषे. असि होता न ईड्यः.. (३) हे अग्नि! आप अरणियों से उत्पन्न होने वाले व देवताओं के दूत हैं. आप आसन फैलाने वाले यजमान के लिए देवताओं को बुला लाइए. आप मददगार और उपासना के योग्य हैं. (३) मित्रं वय ꣳ हवामहे वरुण ꣳ सोमपीतये. या जाता पूतदक्षसा.. (४) हम शुद्ध, बलवान और यज्ञस्थल में प्रकट होने वाले मित्र और वरुण देवता का सोमरस पीने के लिए यज्ञ में आह्वान करते हैं. (४) ऋतेन यावृतावृधावृतस्य ज्योतिषस्पती. ता मित्रावरुणा हुवे.. (५) मित्र और वरुण देवता यजमान पर दयालु हैं. वे सत्यमार्गियों पर कृपालु हैं. उन प्रकाशमान मित्र और वरुण देवताओं का हम आह्वान करते हैं. (५) वरुणः प्राविता भुवान्मित्रो विश्वाभिरूतिभिः. करतां नः सुराधसः.. (६) मित्र और वरुण देवता अपने सभी रक्षा साधनों से हमारी रक्षा करें. वे हमारे शरणदाता हैं. वे हमें यशस्वी धन प्रदान करने की कृपा करें. (६) इन्द्रमिद्गाथिनो बृहदिन्द्रमर्केभिरर्किणः. इन्द्रं वाणीरनूषत.. (७) साम गाने वाले पुरोहितों ने बृहतसाम गा कर इंद्र की स्तुति की. यजमानों ने भी मंत्र गा कर इंद्र की स्तुति की. शेष बचे हुए लोगों ने भी वाणी से इंद्र की स्तुति की. (७) इन्द्र इद्धर्योः सचा सम्मिश्ल आ वचोयुजा. इन्द्रो वज्री हिरण्ययः.. (८) इंद्र वज्रधारी हैं. वे सोने के आभूषणधारी हैं. उन की वाणी सुनते ही हरि नामक घोड़े रथ में जुत जाते हैं. अब वे अपने उन्हीं घोड़ों को एक साथ रथ में जोतने वाले हैं. (८) इन्द्र वाजेषु नो ऽ व सहस्रप्रधनेषु च. उग्र उग्राभिरूतिभिः.. (९) हे इंद्र! आप किसी से नहीं हार सकते. आप हमें अपना प्रबल संरक्षण प्रदान कीजिए. जिन युद्धों में हजारों हाथीघोड़ों का लाभ होता है, उन युद्धों में भी आप हमारी सहायता कीजिए. (९) इन्द्रो दीर्घाय चक्षस आ सूर्य ꣳ रोहयदि्व. वि गोभिरद्रिमैरयत्.. (१०) ebook converter DEMO Watermarks*