भारतकोश
सामवेद संहिता (सरल हिन्दी भावार्थ सहित)

सामवेद संहिता (सरल हिन्दी भावार्थ सहित)

Samaveda Samhita with Hindi Translation

डा. रेखा व्यास द्वारा

स्रोत: संस्कृत साहित्य प्रकाशन · संस्कृत साहित्य प्रकाशन (उद्गम)

DevanagariSanskritpublished310 पृष्ठ

पृष्ठ 153, कुल 310 में से

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पृष्ठ 153

इन्द्रं विश्वा अवीवृधन्त्समुद्रव्यचसं गिरः रथीतम २४ रथीनां वाजानां २४ सत्पतिं पतिम्.. (४) हे इंद्र! आप समुद्र जैसे भरेपूरे हैं और विश्व को धारण करते हैं. आप सत्पति, शक्तिपति और दैवी शक्तियों के स्वामी हैं. हम वाणी से आप की उपासना करते हैं. (४) सख्ये त इन्द्र वाजिनो मा भेम शवसस्पते. त्वामभि प्र नोनुमो जेतारमपराजितम्.. (५) हे इंद्र! हम आप के सखा हैं. आप शक्तिमान हैं. आप की छत्रछाया में हम कभी किसी से भयभीत न हों. आप अपराजेय व विजेता हैं. हम आप को नमन करते हैं. (५) पूर्वीरिन्द्रस्य रातयो न वि दस्यन्त्यूतयः. यदा वाजस्य गोमत स्तोतृभ्यो म २४ हते मघम्.. (६) हे इंद्र! आप का दान अपूर्व है. आप हमें (पूर्ण) संरक्षण देते हैं. आप जब उपासकों को अन्नधन दान देते हैं तो वह कभी क्षीण नहीं होता. (६)