भारतकोश
सामवेद संहिता (सरल हिन्दी भावार्थ सहित)

सामवेद संहिता (सरल हिन्दी भावार्थ सहित)

Samaveda Samhita with Hindi Translation

डा. रेखा व्यास द्वारा

स्रोत: संस्कृत साहित्य प्रकाशन · संस्कृत साहित्य प्रकाशन (उद्गम)

DevanagariSanskritpublished310 पृष्ठ

पृष्ठ 156, कुल 310 में से

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पृष्ठ 156

यो अग्निं देववीतये हविष्माँ आविवासति. तस्मै पावक मृडय.. (३) हे अग्नि! आप हविमान हैं. हम देवताओं को हवि पहुंचाने के लिए आप से अनुरोध करते हैं. आप पवित्र हैं. आप हमें सुखी बनाने की कृपा कीजिए. (३) मित्र ॐ हुवे पूतदक्षं वरुणं च रिशादसम्. धियं घृताची ॐ साधन्ता.. (४) हे मित्र! आप पवित्र और दक्ष हैं. हे वरुण! आप जल उपजाते हैं. आप दोनों देव हमें बुद्धि प्रदान कीजिए. आप हमें साधिए एवं हमारे शत्रुओं का नाश कीजिए. हम आप दोनों देवों का आह्वान करते हैं. (४) ऋतेन मित्रावरुणावृतावृधावृतस्पृशा. क्रतुं बृहन्तमाशाथे.. (५) हे मित्र! हे वरुण! आप सत्य के रक्षक हैं. आप यज्ञ को सफल बनाते हैं. आप हमें भी पुण्यशाली व सत्य का रक्षक बनाइए. (५) कवी नो मित्रावरुणा तुविजाता उरुक्षया. दक्षं दधाते अपसम्.. (६) हे मित्र! हे वरुण! आप दक्ष, जलधारी, कवि व अनेक स्थानों पर वास करते हैं. आप हमें क्षमतावान बनाते हैं. (६) इन्द्रेण स ॐ हि दृक्षसे संजग्मानो अबिभ्युषा. मन्दू समानवर्चसा.. (७) हे मरुद्गण! आप समान वर्चस्व वाले सदैव प्रसन्न रहते हैं. आप तेजोमय, वीर व भयमुक्त हैं. आप इंद्र के साथ सुशोभित होते हैं. (७) आदह स्वधामनु पुनर्गर्भत्वमेरिरे. दधाना नाम यज्ञियम्.. (८) हे मरुद्गण! आप पूजनीय व नामधारी हैं. आप अपने धाम (नष्ट होने के बाद फिर से उत्पन्न होने वाले अन्न और जल) में गर्भ धारण कर के आकार प्राप्त करते हैं. आप यज्ञ को धारण करते हैं. (८) वीडु चिदारुजत्नुभिर्गुहा चिदिन्द्र वह्निभिः. अविन्द उस्रिया अनु.. (९) हे इंद्र! आप मजबूत से मजबूत किले को भी ढहा सकते हैं. आप गूढ़ से गूढ़ गुफा में भी प्रवेश कर सकते हैं. आग जैसे तेजस्वी मरुद्गण रुकी हुई किरणों को प्रकाश में लाते हैं. (९) ता हुवे ययोरिदं पप्रे विश्वं पुरा कृतम्. इन्द्राग्नी न मर्धतः.. (१०) हे इंद्र! हे अग्नि! आप पराक्रमी उपासकों के सारे कष्ट हरने वाले व सनातन हैं. हम आप दोनों देवों का आह्वान करते हैं. (१०) उग्रा विघनिना मृध इन्द्राग्नी हवामहे. ता नो मृडात ईदृशे.. (११) ebook converter DEMO Watermarks*