भारतकोश
सामवेद संहिता (सरल हिन्दी भावार्थ सहित)

सामवेद संहिता (सरल हिन्दी भावार्थ सहित)

Samaveda Samhita with Hindi Translation

डा. रेखा व्यास द्वारा

स्रोत: संस्कृत साहित्य प्रकाशन · संस्कृत साहित्य प्रकाशन (उद्गम)

DevanagariSanskritpublished310 पृष्ठ

पृष्ठ 159, कुल 310 में से

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पृष्ठ 159

हे इंद्र! हम आप के उपासक हैं. हम भव सागर पार करना चाहते हैं. हम बुद्धि का बल (शारीरिक बल के साथसाथ) भी पाना चाहते हैं. चलता हुआ पहिया जैसे एकदम नीचे आ जाता है, वैसे ही हम प्रार्थना रूपी पहिए से इंद्र के लिए झुक जाते हैं. (६) न दुष्टुतिर्द्रविणोदेषु शस्यते न सेधन्त १४ रयिर्नशत्. सुशक्तिरिन्मघवन् तुभ्यं मावते देष्णं यत्पार्ये दिवि.. (७) हे इंद्र! सोमयाग में सशक्त (उत्तम) उपासकों को आप उचित (उपयुक्त) धन प्रदान करते हैं. जो लोग दानदाता की निंदा करते हैं, जो लोग अच्छा काम करने वालों की निंदा करते हैं, ऐसे लोगों पर आप अपनी कृपा मत कीजिए. (७) पांचवां खंड तिस्रो वाच उदीरते गावो मिमन्ति धेनव:. हरिरेति कनिक्रदत्.. (१) यजमान तीन वाणियां उचारते हैं. उन वाणियों को सुन कर हरे रंग का सोमरस दुधारू गाय के रंभाने जैसी आवाज करता हुआ प्रवाहित होता है. (१) अभि ब्रह्मीरनूषत यह्वीर्रृतस्य मातर:. मर्ज्यन्तीर्दिवः शिशुम्.. (२) हम यजमान स्वर्गलोक के शिशु सोम को परिष्कृत करने के लिए मंत्र उचारते हैं. सत्य की माता से सोम उत्पन्न हुए हैं. ब्रह्मज्ञानी सोम की उपासना करते हैं. (२) रायः समुद्रा १४ श्रुतुरोस्मभ्य १४ सोम विश्वतः. आ पवस्व सहस्रिणः.. (३) हे सोम! आप हमें सभी प्रकार के सुख दीजिए. आप हमें सभी प्रकार के धन दीजिए. आप हमारी हजारों इच्छाओं को पूरा करने के लिए प्रवाहित होने की कृपा कीजिए. (३) सुतासो मधुमत्तमाः सोमा इन्द्राय मन्दिनः. पवित्रवन्तो अक्षरं देवान् गच्छन्तु वो मदाः.. (४) हे सोम! आप मधुमान हैं. हम आप के पुत्र हैं. आप इंद्र को प्रसन्न करने के लिए प्रवाहित होइए. आप पवित्र हैं और कभी क्षरित (नष्ट) नहीं होते. आप देवताओं को आनंद प्रदान करने के लिए उन के पास जाने की कृपा कीजिए. (४) इन्दुरिन्द्राय पवत इति देवासो अब्रुवन्. वाचस्पतिर्मखस्यते विश्वस्येशान ओजसः.. (५) हे इंद्र! उपासक आप के लिए सोमरस स्वच्छ करते हैं. आप सब के ईश्वर, ओजस्वी और वाचस्पति हैं. यज्ञ में सोमरस का उपयोग किया जाता है. (५) सहस्रधारः पवते समुद्रो वाचमीङ्खयः. सोमस्पती रयीणा १४ सखेन्द्रस्य दिवेदिवे.. (६) ebook converter DEMO Watermarks*