सामवेद संहिता (सरल हिन्दी भावार्थ सहित)
Samaveda Samhita with Hindi Translation
डा. रेखा व्यास द्वारा
स्रोत: संस्कृत साहित्य प्रकाशन · संस्कृत साहित्य प्रकाशन (उद्गम)
पृष्ठ 167, कुल 310 में से
संदर्भ में पढ़ेंतवाह ꣫ सोम रारण सख्य इन्दो दिवेदिवे. पुरूणि बभ्रो नि चरन्ति मामव परिधी ꣫ रति ताँ इहि.. (४) हे सोम! आप प्रकाशमान हैं. हम प्रतिदिन आप से मित्रता करने के लिए इच्छुक रहते हैं. आप उन सभी का नाश कीजिए, जो हमें सताते हैं. (४) तवाहं नक्तमुत सोम ते दिवा दुहानो बभ्र ऊधनि. घृणा तपन्तमति सूर्यं परः शकुना इव पत्तिम.. (५) हे सोम! आप चमकते हैं. आप उजले हैं. हमें दिनरात आप का साहचर्य प्राप्त हो. दूर से ही चमचमाते सूर्य की तरह आप को भी दूर से देखा जा सकता है. आप पक्षियों की भांति गतिशील हैं. (५) पुनानो अक्रमीदभि विश्वा मृधो विचर्षणिः. शुम्भन्ति विप्रं धीतिभिः.. (६) हे सोम! ब्राह्मण बुद्धिपूर्वक की गई प्रार्थनाओं से आप की उपासना करते हैं. आप पवित्र, विलक्षण व सर्वद्रष्टा हैं. (६) आ योनिमरुणो रुहदगमदिन्द्रो वृषा सुतम्. ध्रुवे सदसि सीदतु.. (७) सोमरस अरुण (गुलाबी) आभा वाला है. वह इंद्र के लिए द्रोणकलश में स्थापित किया जा रहा है. वह इंद्र को बलवान बनाता है. इंद्र उस सोमरस को पीने के लिए सदन में श्रेष्ठ स्थान पर प्रतिष्ठित हों. (७) नू नो रयिं महामिन्दो ऽ स्मभ्य ꣫ सोम विश्वतः. आ पवस्व सहस्रिणम्.. (८) हे सोम! आप तृप्तिकारक हैं. आप हजार धाराओं से झरिए. आप सभी ओर से सब प्रकार का वैभव हमें प्रदान करने की कृपा कीजिए. (८) पांचवां खंड पिबा सोममिन्द्र मन्दतु त्वा यं ते सुषाव हर्यश्वाद्रिः. सोतुर्बाहुभ्या ꣫ सुयतो नार्वा.. (१) हे इंद्र! यजमान अपने दोनों हाथों से पत्थरों से कूटकूट कर सोमरस निकालते हैं. आप उस सोमरस को पी कर आनंदित हों. आप इसे पीजिए. आप अश्वों के स्वामी हैं. आप हमें भी अश्व जैसा बल प्रदान कीजिए. (१) यस्ते मदो युज्यश्चारुरस्ति येन वृत्राणि हर्यश्व ह ꣫ सि. स त्वामिन्द्र प्रभूवसो ममत्तु.. (२) हे इंद्र! आप अश्वों के स्वामी व ऐश्वर्यशाली हैं. आप सोमरस पी कर प्रसन्न होइए. आप अपने सुंदर घोड़ों को रथ में जोतिए. आप प्रसन्न हो कर हमारे शत्रुओं का नाश कीजिए. हे ebook converter DEMO Watermarks*