भारतकोश
सामवेद संहिता (सरल हिन्दी भावार्थ सहित)

सामवेद संहिता (सरल हिन्दी भावार्थ सहित)

Samaveda Samhita with Hindi Translation

डा. रेखा व्यास द्वारा

स्रोत: संस्कृत साहित्य प्रकाशन · संस्कृत साहित्य प्रकाशन (उद्गम)

DevanagariSanskritpublished310 पृष्ठ

पृष्ठ 169, कुल 310 में से

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पृष्ठ 169

की उपासना करनी चाहिए. (८) छठा खंड परि प्रिया दिवः कविर्वया २४ सि नप्त्योर्हितः. स्वानेर्याति कविक्रतुः.. (१) हे सोम! आप प्रिय, कवि, हितकारी हैं और लकड़ी की वेदी पर प्रतिष्ठित हैं. आप दीर्घायु दाता हैं. यज्ञ में आप का दिव्य रस अध्वर्यु (पुरोहित) की कृपा से प्राप्त होता है. (१) स सूनुर्मातरा शुचिर्जातो जाते अरोचयत्. महान्मही ऋतावृधा.. (२) हे सोम! आप सुपुत्र हैं. पृथ्वी आप की माता व अंतरिक्ष आप के पिता हैं. आप अपने मातापिता को सुशोभित करते हैं और ऋत् (सत्य) से बढ़ोतरी पाते हैं. (२) प्रप्र क्षयाय पन्यसे जनाय जुष्टो अद्रुहः. वीत्यर्ष पनिष्टये.. (३) हे सोम! आप उपासना के योग्य हैं. यजमान आप की स्थिरता का प्रयास करते हैं. जो मनुष्य द्वेष रहित हैं और जो आप का गुणगान करते हैं, उन को आप पोषक आहार के रूप में प्राप्त होते हैं. (३) त्व २४ ह्मा ३ झ् दैव्य पवमान जनिमानि द्युमत्तमः. अमृतत्वाय घोषयन्.. (४) हे सोम! आप दिव्य, पवित्र और उत्तम हैं. आप की अमरता की घोषणा करते हुए यजमान उपासना करते हैं. (४) येना नवग्वा दध्यङ्ङपोर्णुते येन विप्रास आपिरे. देवाना २४ सुम्ने अमृतस्य चारुणो येन श्रवा २४ स्याशत.. (५) हे सूर्य! आप की किरणें नई हैं. सोमरस भी नए कामों में लगाते हैं, जिस से (सोम से) ब्राह्मणगण प्रचुर धन पाते हैं, जिस से यजमानों को अन्न मिलता है. सोम अच्छे मन वाले हैं. सुंदर सोम से देवों को भी अमृत प्राप्त होता है. (५) सोमः पुनान ऊर्मिणाव्यं वारं वि धावति. अग्रे वाचः पवमानः कनिक्रदत्.. (६) हे सोम! आप पवित्र, लहरदार व अग्रगामी हैं. यजमान वाणी से आप को और पवित्र बनाते हैं. आप दौड़ते और आवाज करते हुए द्रोणकलश में जाते हैं. (६) धीभिर्मृजन्ति वाजिनं वने क्रीडन्तमत्यविम्. अभि त्रिपृष्ठं मतयः समस्वरन्.. (७) यजमान बलवान सोमरस को बुद्धिपूर्वक परिष्कृत करते हैं. सोम वन में क्रीड़ा करते हैं. समान स्वर में (एक साथ) बुद्धिपूर्वक प्रार्थना गा कर यजमान तीन बरतनों में रखे सोमरस की उपासना करते हैं. (७) असर्जि कलशाँ अभि मीढ्वांत्सप्तिर्न वाजयूः. पुनानो वाचं जनयन्नसिष्यदत्.. (८) ebook converter DEMO Watermarks*