भारतकोश
सामवेद संहिता (सरल हिन्दी भावार्थ सहित)

सामवेद संहिता (सरल हिन्दी भावार्थ सहित)

Samaveda Samhita with Hindi Translation

डा. रेखा व्यास द्वारा

स्रोत: संस्कृत साहित्य प्रकाशन · संस्कृत साहित्य प्रकाशन (उद्गम)

DevanagariSanskritpublished310 पृष्ठ

पृष्ठ 171, कुल 310 में से

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पृष्ठ 171

न किष्ट्वद्रथीतरों हरी यदिन्द्र यच्छसे. न किष्ट्वानु मज्मना न किः स्वश्व आनशे.. (५) हे इंद्र! आप जैसा कोई अन्य वीर है ही नहीं, न ही आप जैसा कोई घोड़ों का पालनहार, न ही घोड़ों का स्वामी, न ही आप जैसा कोई बलवान है. आप घोड़ों से चलने वाले रथ में विराजते हैं. (५) इन्द्राय नूनमर्चतोक्थानि च ब्रवीतन. सुता अमत्सुरिन्दवो ज्येष्ठं नमस्यता सहः.. (६) हे यजमानो! आप निश्चित रूप से इंद्र की ही पूजा कीजिए. आप उन के लिए प्रार्थना गाइए. इंद्र देवों में ज्येष्ठ (बड़े) हैं. आप अपने पुत्रों सहित उन्हें नमन कीजिए. (६) इन्द्र जुषस्व प्र वहा याहि शूर हरिह. पिबा सुतस्य मतिर्न मधोश्चकानश्चारुर्मदाय.. (७) हे इंद्र! आप शूरवीर व घोड़ों के स्वामी हैं. आप आइए. आप के पुत्र (यजमान) आप को प्रसन्न करने के लिए सोमरस भेंट कर रहे हैं. आप उस मधुर सोमरस को पीने की कृपा कीजिए. (७) इन्द्र जठरं नव्यं न पृणस्व मधोर्दिवो न. अस्य सुतस्य स्वा ३ र्नोप त्वा मदाः सुवाचो अस्थुः.. (८) हे इंद्र! आप जैसे अपने दिव्यलोक में अपने पुत्रों की प्रार्थनाओं को सुन कर प्रसन्न होते हैं, वैसे ही आप मधुर दिव्य सोमरस को पी कर प्रसन्न होने की कृपा कीजिए. (८) इन्द्रस्तुराषाण्मित्रो न जघान वृत्रं यतिर्न. बिभेद वलं भृगुर्न ससाहे शत्रून्मदे सोमस्य.. (९) हे इंद्र! आप दुश्मनों के नाशक व शत्रुजित् हैं. भृगु ऋषि ने जिस प्रकार वल राक्षस को मार गिराया, उसी प्रकार सोमरस पान से ऊर्जस्वी हो कर आप भी हमारे शत्रुओं को मार गिराएं. (९) ebook converter DEMO Watermarks*