भारतकोश
सामवेद संहिता (सरल हिन्दी भावार्थ सहित)

सामवेद संहिता (सरल हिन्दी भावार्थ सहित)

Samaveda Samhita with Hindi Translation

डा. रेखा व्यास द्वारा

स्रोत: संस्कृत साहित्य प्रकाशन · संस्कृत साहित्य प्रकाशन (उद्गम)

DevanagariSanskritpublished310 पृष्ठ

पृष्ठ 177, कुल 310 में से

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पृष्ठ 177

हे सोम! आप वन में विराजमान रहते हैं. आप द्युतिमान हैं. आप आवाज करते हुए द्रोणकलश में जाते हैं. (१) अप्सा इन्द्राय वायसे वरुणाय वरुद्भ्यः. सोमा अर्षन्तु विष्णवे.. (२) हे सोम! आप इंद्र, वायु, वरुण, मरुद्गणों, विष्णु के लिए जल में मिश्रित होने की कृपा कीजिए. (२) इषं तोकाय नो दधदस्मभ्य २४ सोम विश्वतः. आ पवस्व सहस्रिणम्.. (३) हे सोम! आप हमारे लिए सभी प्रकार के वैभव सभी ओर से प्रदान कीजिए. आप हजारों धाराओं से झरने की कृपा कीजिए. (३) सोम उ ष्वाणः सोतृभिरधि ष्णुभिरवीनाम्. अश्व्येव हरिता याति धारया मन्द्रया याति धारया.. (४) हे सोम! यजमान आप को निचोड़ कर परिष्कृत करते हैं. आप घोड़े की तरह गतिशील धारा से द्रोणकलश में जाते हैं. आप मंद गति से द्रोणकलश में जाते हैं. (४) अनूपे गोमान् गोभिरक्षाः सोमो दुग्धाभिरक्षाः. समुद्रं न संवरणान्यग्मन्मन्दी मदाय तोशते.. (५) हे सोम! नदियां जैसे समुद्र का वरण कर के स्थिर होती हैं, उसी प्रकार सोमरस द्रोणकलश में पहुंच कर स्थिर हो रहा है. सोमरस अनुपम, गो से युक्त, आनंददायी व पोषक है. (५) यत्सोम चित्रमुक्थ्यं दिव्यं पार्थिवं वसु. तन्नः पुनान आ भर.. (६) हे सोम! आप दिव्य व अद्भुत हैं. पृथ्वी पर जो भी ऐश्वर्य है, वह सब आप हमें प्राप्त कराने की कृपा कीजिए. (६) वृषा पुनान आयु २४ षि स्तनयन्नधि बर्हिषि. हरिः सन्योनिमासदः.. (७) हे सोम! आप हरे व पवित्र हैं. आप आवाज करते हुए श्रेष्ठ योनि (स्थान) में कुश के आसन पर विराजमान होइए. (७) युव २४ हि स्थः स्वःपती इन्द्रश्च सोम गोपती. ईशाना पिप्यतं धियः.. (८) हे इंद्र! हे सोम! आप देव वैभव के स्वामी हैं. आप गोपति (स्वामी) व बुद्धि के रक्षक हैं. आप हमारी बुद्धि को श्रेष्ठ कर्मों में (राहों में) लगाने की कृपा कीजिए. (८) पांचवां खंड इन्द्रो मदाय वावृधे शवसे वृत्रहा नृभिः.