सामवेद संहिता (सरल हिन्दी भावार्थ सहित)
Samaveda Samhita with Hindi Translation
डा. रेखा व्यास द्वारा
स्रोत: संस्कृत साहित्य प्रकाशन · संस्कृत साहित्य प्रकाशन (उद्गम)
पृष्ठ 217, कुल 310 में से
संदर्भ में पढ़ेंयह सोमरस मनुष्यों में उसी प्रकार जल्दी पहुंच रहा है, जैसे बाज पक्षी अपने शिकार के पास पहुंचता है व प्रेमी अपनी प्रेमिका के पास जाता है. (३) एष स्य मद्यो रसो ऽ व चष्टे दिवः शिशुः. य इन्दुर्वारेमाविशत्.. (४) सोम स्वर्गलोक के शिशु (बच्चे), मददायी और सर्वद्रष्टा हैं. ये छलनी से शुद्ध होते हैं. (४) एष स्य पीतये सुतो हरिरर्षति धर्णसिः. क्रन्दन्त्योनिमभि प्रियम्.. (५) सोम आवाज करते हुए अपने अभीष्ट (प्रिय) स्थान (द्रोणकलश) में जाते हैं. इन्हें देवताओं के पीने के लिए तैयार किया जाता है. ये हरित कांति वाले हैं. ये सब को धारण करते हैं. (५) एतं त्य ꣳ हरितो दश मर्मृज्यन्ते अपस्युवः. याभिर्मदाय शुम्भते.. (६) इंद्र को प्रसन्न करने के लिए सोमयाग किया जाता है. दसों अंगुलियां मलमल कर सोमरस को शुद्ध करती हैं. (६) चौथा खंड एष वाजी हितो नृभिर्विश्वविन्मनसस्पतिः. अव्यं वारं वि धावति.. (१) सोम मन के राजा, संसार को जानने वाले और घोड़े के समान तेजी से दौड़ कर द्रोणकलश में जाते हैं. (१) एष पवित्रे अक्षरतसोमो देवेभ्यः सुतः. विश्वा धामान्याविशन्.. (२) सोमरस अमर व पवित्र है. वह देवताओं और उन की पीढ़ियों के लिए झरता है. यह छन कर उन में (देवताओं में) व्याप्त हो जाता है. (२) एष देवः शुभायते ऽ थि योनावमर्त्यः. वृत्रहा देववीतमः.. (३) सोम देवताओं को बहुत अधिक भाते हैं. वे देवताओं की दिव्यता (दैवीभाव) को और अधिक बढ़ा देते हैं. वे अमर और शत्रुनाशी हैं. यज्ञ के कलश में सोमरस बहुत अधिक शोभित होता है. (३) एष वृषा कनिक्रदद्दशभिर्जामिभिर्यतः. अभि द्रोणानि धावति.. (४) दसों अंगुलियां मलमल कर सोमरस को निचोड़ती हैं. यह शक्तिशाली है. यह आवाज करता व दौड़ता हुआ द्रोणकलश में पहुंचता है. (४) एष सूर्यमरोचयत्पवमानो अधि द्यवि. पवित्रे मत्सरो मदः.. (५) स्वर्गलोक पवित्रकारी है. सोमरस स्वर्गलोक में आनंद देने वाला है. पवित्र और छाना ebook converter DEMO Watermarks*