सामवेद संहिता (सरल हिन्दी भावार्थ सहित)
Samaveda Samhita with Hindi Translation
डा. रेखा व्यास द्वारा
स्रोत: संस्कृत साहित्य प्रकाशन · संस्कृत साहित्य प्रकाशन (उद्गम)
पृष्ठ 250, कुल 310 में से
संदर्भ में पढ़ेंतत्पश्चात वसुरुच देवगण सोम का दर्शन करते हैं. अंधेरे को दूर करने वाले सूर्य के उगने से पहले पूजनीय सोम की स्तुति की जाती है. यह स्तुति ऐसे की जाती है, जैसे आदरणीय भाई की की जाती है. (७) अध यदिमे पवमान रोदसी इमा च विश्वा भुवनाभि मज्पना. यूथे न निष्ठा वृषभो वि राजसि.. (८) हे सोम! आप परिष्कृत व पवित्र हैं. गायों के झुंड में बैल के समान आप स्वर्गलोक और पृथ्वीलोक के बीच सुशोभित होते हैं. (८) इममू षु त्वमस्माक ॐ सनिं गायत्रं नव्या ॐ सम्. अग्ने देवेषु प्र वोचः.. (९) हे अग्नि! हमारे साम मंत्र गायक (पुरोहित) भलीभांति और भाव भरे साम मंत्र गाते हैं. आप हमारी उन प्रार्थनाओं को निर्धारित देवताओं के पास पहुंचाने की कृपा कीजिए. (९) विभक्तासि चित्रभानो सिन्धोरूर्मा उपाक आ. सद्यो दाशुषे क्षरसि.. (१०) हे अग्नि! आप समुद्र की लहरों की तरह हवि देने वाले को उत्तम फल देते हैं. आप धनदाता और लपटों से सुशोभित हैं. (१०) आ नो भज परमेष्वा वाजेषु मध्यमेषु. शिक्षा वस्वो अन्तमस्य.. (११) आप हमें ज्येष्ठ, मध्यम, कनिष्ठ आदि सभी प्रकार की धनसंपत्ति व शिक्षा धन दीजिए. हम आप को आमंत्रित करते हुए भजते हैं. (११) अहमिद्धि पितुष्परि मेधामृतस्य जग्रह. अह ॐ सूर्य इवाजनि.. (१२) हे इंद्र! हम जब पिता जैसे आप की श्रेष्ठ बुद्धि पाते हैं, तो हमें ऐसा लगता है मानो हम सूर्य जैसे हो गए हों. (१२) अहं प्रत्नेन जन्मना गिरः शुम्भामि कण्ववत्. येनेन्द्रः शुष्ममिद्दधे.. (१३) हम कण्व ऋषि की भांति प्रयत्नपूर्वक रचे गए पुरातन वेदवाणी से मंत्रपाठ कर के इंद्र की छवि बढ़ाते हैं. उन्हीं के प्रभाव से वे हम पर कृपालु होते हैं. (१३) ये त्वामिन्द्र न तुष्टुवुऋषयो ये च तुष्टुवुः. ममेदद्धर्ध्वस्व सुष्टुतः.. (१४) हे इंद्र! आप को प्रसन्न करने वाले और संतुष्ट ऋषियों में हमारी प्रार्थनाओं की प्रशंसा होती है. उन के प्रभाव से आप संतुष्ट होइए, बढ़ोतरी पाइए. (१४) दूसरा खंड अग्ने विश्वेभिरग्निभिर्जोषि ब्रह्म सहस्कृत. ये देवत्रा य आयुषु तेभिर्नो महया गिरः.. (१) ebook converter DEMO Watermarks*