भारतकोश
सामवेद संहिता (सरल हिन्दी भावार्थ सहित)

सामवेद संहिता (सरल हिन्दी भावार्थ सहित)

Samaveda Samhita with Hindi Translation

डा. रेखा व्यास द्वारा

स्रोत: संस्कृत साहित्य प्रकाशन · संस्कृत साहित्य प्रकाशन (उद्गम)

DevanagariSanskritpublished310 पृष्ठ

पृष्ठ 286, कुल 310 में से

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पृष्ठ 286

और धन दीजिए. (८) युंक्ष्वा हि वाजिनीवत्यश्वाँ अद्यारुणाँ उषः. अथा नो विश्वा सौभगान्या वह.. (९) हे उषा! आप यज्ञ कार्य आरंभ कराने वाली व धनवती हैं. आप अपने रथ में लाल घोड़ों को जोतिए. हमें संसार में सौभाग्यवान बनाने की कृपा कीजिए. (९) अश्विना वर्तिरस्मदा गोमद्दस्रा हिरण्यवत्. अर्वाग्रथ ꣳ समनसा नि यच्छतम्.. (१०) हे अश्विनीकुमारो! आप शत्रुओं का नाश करने वाले हैं. आप हमें गोवान बनाइए. आप अपने सुनहरे रथ को मन से हमारे यज्ञ में लाने की कृपा कीजिए. (१०) एह देवा मयोभुवा दस्रा हिरण्यवर्तनी. उषर्बुधो वहन्तु सोमपीतये.. (११) उषा के साथ उद्बुद्ध (जाग्रत) सुनहरी किरणें, इन सुखमय अश्विनीकुमारों को सोमपान करने के लिए हमारे यज्ञ में लाने की कृपा करें. (११) यावित्था श्लोकमा दिवो ज्योतिर्जनाय चक्रथुः. आ न ऊर्जं वहतमश्विना युवम्.. (१२) हे अश्विनीकुमारो! आप स्वर्गलोक से यज्ञ के लिए ज्योति ला कर लोगों का हित करने की कृपा कीजिए. आप दोनों हमें अन्नवान व ऊर्जावान बनाने की कृपा कीजिए. (१२) तीसरा खंड अग्निं तं मन्ये यो वसुरस्तं यं यन्ति धेनवः. अस्तमर्वन्त आशवो ऽ स्त॑ नित्यासो वाजिन इष ꣳ स्तोतृभ्य आ भर.. (१) हे अग्नि! आप सर्वव्यापक हैं. हम आप की उपासना करते हैं. घोड़े व गाएं जिन की शरण में हैं, हम यजमानों को भी आप अपनी शरण में लीजिए. हम नित्य नियम निभाने वाले और हवि देने वाले हैं. आप हमें अन्नदान कीजिए. हम आप की उपासना करते हैं. (१) अग्निंहिं वाजिनं विशे ददाति विश्वचर्षणिः. अग्नी राये स्वाभुव ꣳ स प्रीतो याति वार्यमिष ꣳ स्तोतृभ्य आ भर.. (२) हे अग्नि! आप यजमान को अन्नवान बनाने वाले, व्यापक दृष्टि वाले और पूजनीय हैं. आप प्रसन्न हो कर आसानी से यजमानों को धन देते हैं. आप उपासकों को भरपूर धन देने की कृपा कीजिए. (२) सो अग्निर्ये वसुर्गृणे सं यमायन्ति धेनवः. समर्वन्तो रघुद्रुवः स ꣳ सुजातासः सूरय इष ꣳ स्तोतृभ्य आ भर.. (३) हे अग्नि! सारी गौएं तेज गति वाले घोड़े व विद्वान् आप की शरण में हैं. आप पूजनीय ebook converter DEMO Watermarks*