सामवेद संहिता (सरल हिन्दी भावार्थ सहित)
Samaveda Samhita with Hindi Translation
डा. रेखा व्यास द्वारा
स्रोत: संस्कृत साहित्य प्रकाशन · संस्कृत साहित्य प्रकाशन (उद्गम)
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संदर्भ में पढ़ेंकहलाया. पांचवां अध्याय पवमान पर्व कहलाता है. इस में सोम विषयक ऋचाएं हैं, जो ऋग्वेद के नवम मंडल से ली गई हैं. पहले से पांचवें अध्याय तक की ऋचाएं 'ग्राम गान' कहलाती हैं. छठे अध्याय का शीर्षक है 'आरण्यक पर्व'. इस में यद्यपि देवताओं और छंदों की भिन्नता है तथापि इस में गायन संबंधी एकता दिखाई देती है. इस अध्याय की ऋचाएं 'अरण्य गान' कही गई हैं, पूर्वार्चिक के छह अध्यायों में कुल ६४० ऋचाएं हैं. उत्तरार्चिक में २१ अध्याय हैं. ऋचाओं की संख्या १२२५ है. इस प्रकार सामवेद में कुल १८६५ ऋचाएं हैं. यह अनुवाद सामवेद की इन ऋचाओं का यह अनुवाद सायण भाष्य पर आधारित है, क्योंकि सायणाचार्य ने वैदिक ऋचाओं (मंत्रों) को समझने के लिए यास्काचार्य द्वारा निर्दिष्ट तीनों साधनों—परंपरागत ज्ञान, तर्क एवं मनन का पूरा सहारा लिया था. इस से भी बड़ी बात यह थी कि उन्होंने अन्य आचार्यों के समान वैदिक ऋचाओं को किसी विशेष वाद का चश्मा पहन कर नहीं देखा है. सायणाचार्य ने वैदिक ऋचाओं के प्रसंग के अनुसार मानव जीवन, यज्ञ और अध्यात्म संबंधी अर्थ दिए हैं. वैसे अधिकतर अर्थ मानव जीवन से संबंधित ही हैं. यज्ञ और अध्यात्म से जुड़े अर्थ प्रायः कम स्थानों पर ही दिए गए हैं. इन्हीं कारणों से अनुवाद करते समय सायण भाष्य को आधार बनाया गया है. अनुवाद के दौरान इस बात का विशेष ध्यान रखा गया है कि सायणाचार्य का आशय पूरी तरह स्पष्ट हो जाए. अनुवाद की भाषा यथासंभव सरल एवं सुबोध रखी गई है, ताकि आम हिंदी पाठक भी आसानी से समझ सकें कि वास्तव में वेदों में क्या है! — प्रकाशक