सामवेद संहिता (सरल हिन्दी भावार्थ सहित)
Samaveda Samhita with Hindi Translation
डा. रेखा व्यास द्वारा
स्रोत: संस्कृत साहित्य प्रकाशन · संस्कृत साहित्य प्रकाशन (उद्गम)
पृष्ठ 56, कुल 310 में से
संदर्भ में पढ़ेंइन्द्रेहि मत्स्यन्धसो विश्वेभिः सोमपर्वभिः महाँ अभिष्टिरोजसा.. (६) हे इंद्र! आप सोमरस के रूप में अन्न ग्रहण कीजिए व प्रसन्न होइए. हमारे यहां पधारिए. अपनी शक्ति से हमें शक्तिमान बनाइए. शत्रुओं को जीतने की शक्ति दीजिए. (६) आ तू न इन्द्र वृत्रहन्नस्माकमर्धमा गहि. महान्महीभिरूतिभिः.. (७) हे इंद्र! आप शत्रुनाशक व बहुत महान हैं. आप हमारे पास जल्दी आइए. आप अपने रक्षा साधनों के साथ शीघ्र हमारे यहां पधारिए. (७) ओजस्तदस्य तित्त्विष उभे यत्समवर्तयत्. इन्द्रश्चर्मेव रोदसी.. (८) हे इंद्र! आप का बल प्रकट होने लगा है. आप स्वर्गलोक और पृथ्वी को चमड़े के समान फैला रहे हैं. (८) अयमु ते समतसि कपोत इव गर्भधिम्. वचस्तच्चिन्न ओहसे.. (९) हे इंद्र! सोमरस के पास आप उसी तरह बराबर बने रहते हैं, जिस तरह गर्भवती कबूतरी के साथ कबूतर बना रहता है. आप से निवेदन है कि आप भी हमारी स्तुतियों के साथ बने रहें. (९) वात आ वातु भेषज ꣳ शम्भु मयोभु नो हृदे. प्र न आयू ꣳ षि तारिषत्.. (१०) वायु हमारे पास शांति और सुखदायी ओषधियां पहुंचाएं. ये ओषधियां हमारी आयु बढ़ाएं. (१०) आठवां खंड य ꣳ रक्षन्ति प्रचेतसो वरुणो मित्रो अर्यमा. न किः स दभ्यते जनः.. (१) जिस यजमान की रक्षा श्रेष्ठ ज्ञान वाले वरुण, मित्र तथा अर्यमा देवता करते हैं, उस यजमान का कोई बाल भी बांका नहीं कर सकता. (१) गव्यो षु णो यथा पुराश्वयोत रथया. वरिवस्या महोनाम्.. (२) हे इंद्र! आप हमेशा की तरह गौओं का समूह, घोड़ों का समूह और यशदायी धन वैभव देने के लिए पधारिए. (२) इमास्त इन्द्र पृश्नयो घृतं दुहत आशिरम्. एनामृतस्य पिप्युषीः.. (३) हे इंद्र! आप की गौएं बहुत सुंदर रंग वाली हैं. ये सत्य और यज्ञ को बढ़ाने वाली हैं. ये हमारे लिए घी देने वाले दूध को टपकाती हैं (देती हैं). (३) अया धिया च गव्यया पुरुणामन्पुरुष्टुत. यत्सोमेसोम आभुवः.. (४) ebook converter DEMO Watermarks*