भारतकोश
सामवेद संहिता (सरल हिन्दी भावार्थ सहित)

सामवेद संहिता (सरल हिन्दी भावार्थ सहित)

Samaveda Samhita with Hindi Translation

डा. रेखा व्यास द्वारा

स्रोत: संस्कृत साहित्य प्रकाशन · संस्कृत साहित्य प्रकाशन (उद्गम)

DevanagariSanskritpublished310 पृष्ठ

पृष्ठ 58, कुल 310 में से

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पृष्ठ 58

आ त्वा विशन्त्विन्दवः समुद्रमिव सिन्धवः. न त्वामिन्द्राति रिच्यते.. (४) हे इंद्र! जैसे नदियां समुद्र में मिलती हैं, वैसे ही सोमरस आप में मिलता है. आप से बढ़ कर कोई महान नहीं है. (४) इन्द्रमिद्गाथिनो बृहदिन्द्रमर्केभिरर्किणः. इन्द्रं वाणीरनूषत.. (५) सामगान गाते हुए उद्गाता (साम गाने वाले पुरोहित) बृहतसाम गा कर इंद्र को प्रसन्न करते हैं. पूजा करने वाले मनुष्य स्तोत्रों से और हम यजमान मंत्रों के द्वारा उन्हें प्रसन्न करते हैं. (५) इन्द्र इषे ददातु न ऋभुक्षणमृभु ॐ रयिम्. वाजी ददातु वाजिनम्.. (६) हम जिस इंद्र की स्तुति कर रहे हैं, वे हमें श्रेष्ठ धन प्रदान करें. इंद्र हमें उन ऋभु देवता को प्रदान करें, जो सोमरस पीने से अमर हो गए. बलवान इंद्र! हमें बलवान छोटे भाई दें ताकि हम अन्न प्राप्त कर सकें. (६) इन्द्रो अङ्ग महद्भयमभी षदप चुच्यवत्. स हि स्थिरो विचर्षणिः.. (७) हे इंद्र! आप स्थिर हैं. आप सारे संसार को देखने वाले व ज्ञानी हैं. आप शीघ्र ही भय को दूर करने वाले तो हैं ही, साथ ही भय को हमेशा के लिए हटा देते हैं. (७) इमा उ त्वा सुतेसुते नक्षन्ते गिर्वणो गिरः. गावो वत्सं न धेनवः.. (८) हे इंद्र! आप ऋचा (मंत्रों) से स्तुति करने योग्य हैं. प्रत्येक यज्ञ में हमारी प्रार्थनाएं आप के पास वैसे ही जल्दी पहुंचती हैं, जैसे दुधारू गाएं अपने बछड़ों के पास पहुंचती हैं. (८) इन्द्रा नु पूषणा वय ॐ सख्याय स्वस्तये. हुवेम वाजसातये.. (९) इंद्र और पूषा देवता को अपने कल्याण के लिए बुलाते हैं. हम मित्रता के लिए उन्हें बुलाते हैं. हम अन्न व जल की प्राप्ति के लिए इन दोनों देवताओं को बुलाते हैं. (९) न कि इन्द्र त्वदुत्तरं न ज्यायो अस्ति वृत्रहन्. न क्येवं यथा त्वम्.. (१०) हे इंद्र! आप वृत्र नामक असुर को मारने वाले हैं. इंद्रलोक में भी आप से श्रेष्ठ कोई नहीं है. आप जैसा महान कोई दूसरा नहीं है. (१०) दसवां खंड तरणिं वो जनानां त्रदं वाजस्य गोमतः. समानमु प्र श ॐ सिषम्.. (१) हे यजमानो! इंद्र हमारा बेड़ा पार लगाने वाले हैं. वे हमारे शत्रुओं को भय दिखाने वाले हैं. वे पशु धन देने वाले हैं. वे अन्नधन देने वाले हैं. मैं उन की सदा स्तुति करता हूं. (१) असृग्रमिन्द ते गिरः प्रति त्वामुदहासत. सजोषा वृषभं पतिम्.. (२) ebook converter DEMO Watermarks*