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सामवेद संहिता (सरल हिन्दी भावार्थ सहित)

Samaveda Samhita with Hindi Translation

डा. रेखा व्यास द्वारा

स्रोत: संस्कृत साहित्य प्रकाशन · संस्कृत साहित्य प्रकाशन (उद्गम)

DevanagariSanskritpublished310 पृष्ठ

हे इंद्र! आप राक्षसों व हिंसकों का विनाश करने की कृपा कीजिए. आप वृत्रासुर जैसे राक्षसों की ठोड़ी तोड़ दीजिए. आप अमित्रों का क्रोध और घमंड दूर करने की कृपा कीजिए. (१९) वि न इन्द्र मृधो जहि नीचा यच्छ पृतन्यतः. यो अस्माँ अभिदासत्यधरं गमया तमः.. (२०) हे इंद्र! हमारी सेना युद्धों में शत्रुओं को पराजित कर दे. हमारे शत्रु मुंह नीचा कर के हमारे सामने आएं. आप उन शत्रुओं को पतन के गर्त में डाल दीजिए, जो हमें अपने अधीन (वश में) करना चाहते हैं. (२०) इन्द्रस्य बाहू स्थविरौ युवानावनाधृष्यौ सुप्रतीकावसह्यौ. तौ युञ्जीत प्रथमौ योग आगते याभ्यां जितमसुराणा १४ सहो महत्.. (२१) इंद्र के बाहु हाथी की सूंड की तरह हैं. आप सर्वप्रथम उन भुजाओं को युद्ध में प्रेरित करने की कृपा कीजिए. आप बलजित्, स्थिर व जवान हैं. आप पर किसी का वश नहीं चल सकता. (२१) मर्माणि ते वर्मणा च्छादयामि सोमस्त्वा राजामृतेनानु वस्ताम्. उरोर्वरीयो वरुणस्ते कृणोतु जयन्तं त्वामु देवा मदन्तु.. (२२) हे इंद्र! हम आप के मर्म स्थानों को कवच से ढकते हैं. राजा सोम आप को अमृतमय बनाने की कृपा करें. वरुण आप को सुख प्रदान करने की कृपा करें. देवता आप को प्रसन्नता प्रदान करें. (२२) अन्धा अमित्र भवताशीर्षाणो ऽ हय इव. तेषां वो अग्निनुन्नानामिन्द्रो हन्तु वरंवरम्.. (२३) हे इंद्र! सिर रहित सांप जैसे अंधा होता है, वैसे ही हमारे अमित्र हो जाएं. उन में से जो अग्नि की ज्वाला से बच जाएं, उन बचे हुए शत्रुओं को आप स्वयं नष्ट करने की कृपा कीजिए. (२३) यो नः स्वो ऽ रणो यश्च निष्ठ्यो जिघा १४ सति. देवास्त १४ सर्वे धूर्वन्तु ब्रह्म वर्म ममान्तरं १४ शर्म वर्म ममान्तरम्.. (२४) जो हमारे अपने हो कर विश्वासपूर्वक छल से हमें मारना चाहते हैं, देवगण उन सभी धूर्तों को नष्ट करने की कृपा करें. वेदों के मंत्र हमारे मर्मस्थान के कवच हैं. वे हमें सुख प्रदान करने की कृपा करें. (२४) मृगो न भीमः कुचरो गिरिष्ठाः परावत आ जगन्था परस्याः. सृक १४ स १४ शाय पविमिन्द्र तिग्मं वि शत्रूं ताढि विमृधो नुदस्व.. (२५) ebook converter DEMO Watermarks*

हे इंद्र! आप पर्वत में रहने वाले शेर के समान भयंकर हैं. दूर से यहां आ कर दूर तक मारक तीखे वज्र से शत्रुओं का नाश करने की कृपा कीजिए. आप लड़ाकू शत्रुओं को दूर करने की कृपा कीजिए. (२५) भद्रं कर्णेभिः शृणुयाम देवा भद्रं पश्येमाक्षभिर्यजत्राः. स्थिरैरंगैस्तुष्टुवा ॐ सस्तनूभिर्व्यशेमहि देवहितं यदायुः.. (२६) हे देवगणो! आप की कृपा से कानों से कल्याणकारी वचन सुनें, आंखों से मंगलमय दृश्य देखने को मिलें. हम स्वस्थ हाथपैर और अंगों से आप की स्तुति कर सकें. आप देवताओं की कृपा से हमें जो भी आयु प्राप्त हुई है, उस का हम स्तुतिपूर्वक सदुपयोग कर सकें. (२६) स्वस्ति न इन्द्रो वृद्धश्रवाः स्वस्ति नः पूषा विश्ववेदाः. स्वस्ति नस्तार्क्ष्यो अरिष्टनेमिः स्वस्ति नो बृहस्पतिर्दधातु.. (२७) इंद्र हमारा कल्याण करने की कृपा करें. सर्वज्ञाता पूषा हमारा कल्याण करने की कृपा करें. अहिंसक अस्त्रशस्त्र वाले गरुड़ व ज्ञान धारण करने वाले बृहस्पति हमारा कल्याण करने की कृपा करें. (२७) (सामवेद पूर्ण)

अथर्ववेद ऋग्वेद ॥ सामवेद ॥ ... वेद ॥ अथर्ववेद ॥ ेद ॥ सामवेद ॥ अथर्ववेद ॥ सामवेद ॥ अथर्ववेद ॥ यजु ऋग्वेद ॥ सामवेद ॥ अथर्ववेद , ऋग्वेद ॥ सामवेद ॥ अथर्ववेद ॥ '॥ सामवेद ॥ अथर्ववेद ॥ यजुव वेद ॥ सामवेद ॥ अथर्ववेद ॥ य वेद ॥ सामवेद ॥ अथर्ववेद ॥ यजु ॥ ऋग्वेद ॥ सामवेद ॥ अथर्ववे सामवेद ॥ अथर्ववेद ॥ यजुर्वेद ॥ ऋग्वेद ॥ सामवेद ॥ अथर्ववेद सामवेद ॥ अथर्ववेद ॥ यजुर्वेद ॥ ऋग्वेद ॥ सामवेद ॥ अ अथर्ववेद ॥ यजुर्वेद ॥ ऋग्वेद ॥ सामवेद ॥ र्वेद ॥ यजुर्वेद ॥ ऋग्वेद ॥ ॥ अथर्ववेद ॥ यजुर्वेद ॥ ऋग्वेद ॥ सामवेद ॥ अ... सामवेद ॥ अथर्ववेद ॥ यजुर्वेद ॥ ऋग्वेद ॥ सामवेद ॥ अ... सामवेद ॥ अथर्ववेद ॥ यजुर्वेद । ऋग्वेद ॥ सामवेद ॥ अथर्ववेद ॥ वेद ॥ सामवेद ॥ अथर्ववेद ॥ य '॥ ऋग्वेद ॥ सामवेद ॥ अथर्ववेद ॥ सामवेद ॥ अथर्ववेद ॥ यजु वेद ॥ सामवेद ॥ अथर्ववेद ॥ यजु ऋग्वेद ॥ सामवेद ॥ अथर्ववेद वेद ॥ सामवेद ॥ अथर्ववेद ॥ ेद ॥ सामवेद ॥ अथर्ववे र्वेद ॥ अथर्ववेद ॥ यजु ऋग्वेद ॥ सामवे अथर्ववेद ॥ डा. गंगा सहाय शर्मा एम.ए. (हिंदी, संस्कृत), पी-एच.डी., व्याकरणाचार्य