भारतकोश
समयसार (प्राकृत गाथा एवं हिन्दी-अंग्रेजी व्याख्या)

समयसार (प्राकृत गाथा एवं हिन्दी-अंग्रेजी व्याख्या)

Samayasara of Acharya Kundakunda with Hindi Commentary

आचार्य कुन्दकुन्द / अमृतचन्द्र सूरि द्वारा

DevanagariHindipublished226 पृष्ठ

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अध्याय - 5 भावप्रत्यय के बिना द्रव्यप्रत्यय नहीं होता - रागो दोसो मोहो य आसवा णत्थि सम्मदिट्ठस्स। तम्हा आसवभावेण विणा हेदू ण पच्चया होंति॥ (5-14-177) हेदू चदुव्वियप्पो अट्ठवियप्पस्स कारणं हवदि। तेसिं पि य रागादी तेसिमभावे ण बज्झंति॥ (5-15-178) राग, द्वेष और मोह ये आस्रव सम्यग्दृष्टि के नहीं होते। इसलिए रागादि भावास्रव के बिना द्रव्य प्रत्यय कर्म-बन्ध के कारण नहीं होते। मिथ्यात्व आदि चार प्रकार के हेतु आठ प्रकार के कर्मों के कारण होते हैं और उन चार प्रकार के हेतुओं के कारण जीव के रागादि भाव हैं। उन रागादि भावों का अभाव होने के कारण सम्यग्दृष्टि के कर्म-बन्ध नहीं होता।