समयसार (प्राकृत गाथा एवं हिन्दी-अंग्रेजी व्याख्या)

समयसार (प्राकृत गाथा एवं हिन्दी-अंग्रेजी व्याख्या)
Samayasara of Acharya Kundakunda with Hindi Commentary
आचार्य कुन्दकुन्द / अमृतचन्द्र सूरि द्वारा
DevanagariHindipublished226 पृष्ठ
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अध्याय - 6 कम्मस्साभावेण य णोकम्माणं पि जायदि णिरोहो। णोकम्मणिरोहेण य संसारणिरोहणं होदि॥ (6-12-192) सर्वज्ञदेव ने (रागादि विभाव कर्मरूप) भावास्रवों के कारण मिथ्यात्व, अज्ञान, अविरतिभाव और योग ये चार अध्यवसान कहे हैं। ज्ञानी के हेतुओं के अभाव में नियम से आस्रव का निरोध होता है। आस्रवभाव के बिना कर्म का भी निरोध हो जाता है और कर्म का अभाव होने से नोकर्मों का भी निरोध हो जाता है। नोकर्म का निरोध होने से संसार का निरोध होता है। इदि छट्टमो संवराधियारो समत्तो 92