भारतकोश
समयसार (प्राकृत गाथा एवं हिन्दी-अंग्रेजी व्याख्या)

समयसार (प्राकृत गाथा एवं हिन्दी-अंग्रेजी व्याख्या)

Samayasara of Acharya Kundakunda with Hindi Commentary

आचार्य कुन्दकुन्द / अमृतचन्द्र सूरि द्वारा

DevanagariHindipublished226 पृष्ठ

पृष्ठ 128, कुल 226 में से

संदर्भ में पढ़ें
पृष्ठ 128

अध्याय - 7 The soul which does not desire for the fruits of various karmas, and for any attributes of physical things, must be understood to be a desire-free right believer. ──────────────── निर्विचिकित्सा अंग का लक्षण - जो ण करेदि दुगुंछं चेदा सव्वेसिमेव धम्माणं। सो खलु णिव्विदिगिंछो सम्मादिट्ठी मुणेदव्वो॥ (7-39-231) जो आत्मा सभी धर्मों के प्रति जुगुप्सा (ग्लानि) नहीं करता है उसे वस्तुतः निर्विचिकित्स सम्यग्दृष्टि मननपूर्वक जानना चाहिये। The soul which does not exhibit revulsion (disgust) for attributes of physical things must be understood to be a revulsion-free right believer. ──────────────── अमूढ़दृष्टि का कथन - जो हवदि असम्मूढो चेदा सद्दिट्ठि सव्वभावेसु। सो खलु अमूढदिट्ठी सम्मादिट्ठी मुणेदव्वो॥ (7-40-232) जो आत्मा समस्त भावों में अमूढ़ और यथार्थ दृष्टि वाला होता है, उसे वस्तुतः अमूढ़दृष्टि सम्यग्दृष्टि मननपूर्वक जानना चाहिये। ••••••••••••••••••• 111