भारतकोश
समयसार (प्राकृत गाथा एवं हिन्दी-अंग्रेजी व्याख्या)

समयसार (प्राकृत गाथा एवं हिन्दी-अंग्रेजी व्याख्या)

Samayasara of Acharya Kundakunda with Hindi Commentary

आचार्य कुन्दकुन्द / अमृतचन्द्र सूरि द्वारा

DevanagariHindipublished226 पृष्ठ

पृष्ठ 132, कुल 226 में से

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अध्याय - 8 अट्ठमो बंधाधियारो BONDAGE OF KARMAS रागादि से कर्म-बन्ध होता है - जह णाम को वि पुरिसो णेहब्भत्तो दु रेणबहुलम्मि। ठाणम्मि ठाइदून य करेदि सत्थेहि वायासं॥ (8-1-237) छिंददि भिंददि य तहा तालीतलकयलिवंसपिंडीओ। सचित्ताचित्ताणं करेदि दव्वाणमुवघादं॥ (8-2-238) उवघादं कुव्वंतस्स तस्स णाणाविहेहिं करणेहिं। णिच्छयदो चिंतेज्ज हु किं पच्चयगो दु रयबंधो॥ (8-3-239) जो सो दु णेहभावो तम्हि णरे तेण तस्स रयबंधो। णिच्छयदो विण्णेयं ण कायचेट्ठाहि सेसाहिं॥ (8-4-240) एवं मिच्छादिट्ठी वट्टंतो बहुविहासु चिट्ठासु। रायादी उवओगे कुव्वंतो लिप्पदि रयेण॥ (8-5-241) जिस प्रकार कोई पुरुष शरीर में तेल लगाकर और बहुत धूल वाले स्थान में रहकर शस्त्रों से व्यायाम करता है, और ताड़, तमाल, कदली और बाँस के समूह को छेदता और भेदता है तथा सचित्त ओर अचित्त द्रव्यों का उपघात करता है; नाना प्रकार के 115

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