भारतकोश
समयसार (प्राकृत गाथा एवं हिन्दी-अंग्रेजी व्याख्या)

समयसार (प्राकृत गाथा एवं हिन्दी-अंग्रेजी व्याख्या)

Samayasara of Acharya Kundakunda with Hindi Commentary

आचार्य कुन्दकुन्द / अमृतचन्द्र सूरि द्वारा

DevanagariHindipublished226 पृष्ठ

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अध्याय - 8 अध्यवसान से पाप, पुण्य का बन्ध - एवमलिये अदत्ते अबंभचेरे परिग्गहे चेव। कीरदि अज्झवसाणं जं तेण दु बज्झदे पावं॥ (8-27-263) तह वि य सच्चे दत्ते बंभे अपरिग्गहत्तणे चेव। कीरदि अज्झवसाणं जं तेण दु बज्झदे पुण्णं॥ (8-28-264) इसी प्रकार (हिंसा के अध्यवसान के समान) असत्य में, चोरी में, अब्रह्मचर्य में और परिग्रह में जो अध्यवसान किया जाता है, उससे पाप का बन्ध होता है। और इसी प्रकार सत्य में, अचौर्य में, ब्रह्मचर्य में और अपरिग्रह में जो अध्यवसान किया जाता है, उससे पुण्य का बन्ध होता है। बन्ध वस्तु से नहीं होता - वत्थुं पडुच्च तं पुण अज्झवसाणं तु होदि जीवाणं। ण हि वत्थुदो दु बंधो अज्झवसाणेण बंधो त्ति। (8-29-265) 126