समयसार (प्राकृत गाथा एवं हिन्दी-अंग्रेजी व्याख्या)

समयसार (प्राकृत गाथा एवं हिन्दी-अंग्रेजी व्याख्या)
Samayasara of Acharya Kundakunda with Hindi Commentary
आचार्य कुन्दकुन्द / अमृतचन्द्र सूरि द्वारा
DevanagariHindipublished226 पृष्ठ
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अध्याय - 10 उत्पन्न नहीं करता, इस कारण वह किसी का कारण भी नहीं है। नियम से कर्म का आश्रय करके कर्ता होता है तथा कर्ता का आश्रय करके कर्म उत्पन्न होते हैं। कर्ता-कर्म की अन्य कोई सिद्धि नहीं देखी जाती। आत्मा और कर्म-प्रकृति का निमित्त-नैमित्तिक सम्बन्ध - चेदा दु पयडीयट्ठं उप्पज्जदि विणस्सदि। पयडी वि चेदयट्ठं उप्पज्जदि विणस्सदि॥ (10-5-312) एवं बंधो य दोण्हं पि अण्णोण्णपच्चया हवे। अप्पणो पयडीए य संसारो तेण जायदे॥ (10-6-313) यह आत्मा प्रकृति के निमित्त से उत्पन्न होता है और नष्ट होता है तथा वे कर्म-प्रकृतियाँ भी आत्मा के निमित्त से उत्पन्न होती हैं और विनाश को प्राप्त होती 149