समयसार (प्राकृत गाथा एवं हिन्दी-अंग्रेजी व्याख्या)

समयसार (प्राकृत गाथा एवं हिन्दी-अंग्रेजी व्याख्या)
Samayasara of Acharya Kundakunda with Hindi Commentary
आचार्य कुन्दकुन्द / अमृतचन्द्र सूरि द्वारा
DevanagariHindipublished226 पृष्ठ
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अध्याय - 2 जीव का नयसापेक्ष स्वरूप - ववहारेण दु एदे जीवस्स हवंति वण्णमादीया। गुणठाणंता भावा ण दु केई णिच्छयणयस्स॥ (2-18-56) ये वर्ण से लेकर गुणस्थानपर्यन्त भाव व्यवहार नय से जीव के होते हैं, परन्तु निश्चय नय के मत में उनमें से कोई भी जीव के नहीं हैं।