भारतकोश
साम्ब पुराण (श्री एस. एन. खण्डेलवाल हिन्दी व्याख्या सहित)

साम्ब पुराण (श्री एस. एन. खण्डेलवाल हिन्दी व्याख्या सहित)

Samba Purana Hindi

महर्षि वेदव्यास (व्याख्याकार: श्री एस. एन. खण्डेलवाल) द्वारा

स्रोत: Sri Samba Purana with Hindi Commentary by Sri S. N. Khandelwal (उद्गम)

DevanagariHindipublished424 पृष्ठ

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पृष्ठ 54

नवमोऽध्यायः

(सूर्यनिगमनम्)

नारद उवाच

अथादित्यस्य नामानि सामान्यानीह द्वादश।
द्वादशापि पृथक्त्वेन तानि वक्ष्याम्यशेषतः॥१॥

नारद कहते हैं—अब आदित्य के सामान्य द्वादश नाम कहता हूँ; पृथक् से भी इनके द्वादश नाम कहे गये हैं, अतः उन सबको विस्तृत रूपेण कहता हूँ॥१॥

आदित्यः सविता सूर्यो मिहिरोऽर्कः प्रभाकरः।
मार्त्तण्डो भास्करो भानुश्चित्रभानुर्दिवाकरः॥२॥
रविर्द्वादशकश्चैव ज्ञेयः सामान्यनामभिः।
विष्णुर्धाता भगः पूषा मित्रेन्द्रो वरुणोर्यमाः॥३॥
विवस्वानांशुमांस्त्वष्टा पर्जन्यो द्वादशः स्मृतः।
इत्येते द्वादशादित्याः पृथक्त्वेन प्रकीर्त्तिताः॥४॥

आदित्य, सविता, सूर्य, मिहिर, अर्क, प्रभाकर, मार्त्तण्ड, भास्कर, भानु, चित्रभानु, दिवाकर तथा रवि—ये १२ सूर्य के साधारण नाम हैं। इसके अतिरिक्त विष्णु, धाता, भग, पूषा, मित्र, इन्द्र, वरुण, यम, विवस्वान्, अंशुमान्, त्वष्टा तथा पर्जन्य—ये १२ भी अलग से आदित्य के नाम कहे गये हैं॥२-४॥

उत्तिष्ठन्ति सदा ह्येते मासैर्द्वादशभिः क्रमात्।
विष्णुस्तपति चैत्रे तु वैशाखे चार्यमा तथा॥५॥
विवस्वान् ज्येष्ठमासे तु आषाढ़े चांशुमान् स्मृतः।
पर्जन्यः श्रावणे मासे वरुणः प्रोष्ठसंज्ञके॥६॥
इन्द्राख्यश्चाश्विने मासे धाता तपति कार्तिके।
मार्गशीर्षे तपेन्मित्रः पौषे पूषा दिवाकरः॥७॥
माघे भगस्तु विज्ञेयस्त्वष्टा तपति फाल्गुने।
एतैर्द्वादशभिर्विष्णूरश्मिभिर्दीप्यते सदा॥८॥

ये क्रमानुसार सर्वदा द्वादश मास में प्रकट होते हैं। चैत्र मास में विष्णु नामक सूर्य ताप प्रदान करते हैं। वैशाख में अर्यमा, ज्येष्ठ में विवस्वान्, आषाढ़ में अंशुमान्, श्रावण में पर्जन्य, भाद्र में वरुण, आश्विन में इन्द्र, कार्तिक में धाता, अग्रहायण में मित्र ताप प्रदान