भारतकोश
साम्ब पुराण (श्री एस. एन. खण्डेलवाल हिन्दी व्याख्या सहित)

साम्ब पुराण (श्री एस. एन. खण्डेलवाल हिन्दी व्याख्या सहित)

Samba Purana Hindi

महर्षि वेदव्यास (व्याख्याकार: श्री एस. एन. खण्डेलवाल) द्वारा

स्रोत: Sri Samba Purana with Hindi Commentary by Sri S. N. Khandelwal (उद्गम)

DevanagariHindipublished424 पृष्ठ

पृष्ठ 62, कुल 424 में से

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पृष्ठ 62

दशमोऽध्यायः

(राज्ञी-निक्षुभोत्पत्तिः)

वशिष्ठ उवाच
एवं श्रुत्वा तु कात्स्न्र्येन दृष्टो जाम्बवतीसुतः।
जातकौतूहलो भूयः परिपप्रच्छ नारदम् ॥१॥

वशिष्ठ देव कहते हैं—ऐसा समुदाय वृत्तान्त सुनकर आनन्दित होकर जाम्बवती-पुत्र साम्ब ने कौतूहल-वशात् नारद से पूछा।।१।।

साम्ब उवाच
अहो सूर्यस्य माहात्म्यं वर्णितं हर्षवर्धनम्।
येन मे भक्तिरुत्पन्ना परे देवे विभावसौ ॥२॥
अतो राज्ञीं महाभागां निक्षुभां च महामुने।
दण्डिनं पिङ्गलादींश्च एवमेतद् वदस्व मे ॥३॥

साम्ब कहते हैं—अहो! आनन्दवर्धक सूर्य के माहात्म्य का आपने वर्णन किया; जिससे परमदेव विभावसु में मेरी भक्ति उत्पन्न हो गई है। अतः हे महामुने! महाभाग्यवती राज्ञी तथा निक्षुभा, दण्डी तथा पिङ्गलादि की कथा भी मुझसे कहिये।।२-३।।

नारद उवाच
प्रागुक्तेऽर्कस्य द्वे भार्ये ते राज्ञीनिक्षुभे शुभे।
तयोश्च राज्ञी द्यौर्ज्ञेया निक्षुभा पृथिवी स्मृता ॥४॥
पौषस्य कृष्णसप्तम्यां द्यौरर्केणेह पूज्यते।
माघस्य कृष्णसप्तम्यां मह्या सह भवेद्रविः ॥५॥

नारद कहते हैं—पहले जो सूर्य की दो पत्नियों की बातें कही हैं, (मंगलमयी राज्ञी तथा निक्षुभा) इनमें राज्ञी है—स्वर्ग तथा निक्षुभा हैं—पृथिवी। पौष मास के कृष्णपक्ष की सप्तमी को राज्ञी का पूजन अर्क (सूर्य) के साथ होता है एवं माघ मास की कृष्ण सप्तमी को निक्षुभा के साथ रवि पूजित होते हैं।।४-५।।

भूश्चादित्यश्च भगवान् गच्छतः सङ्गमं तदा।
ऋतुस्नाता मही तत्र गर्भं गृह्णाति भास्करात् ॥६॥
द्यौर्जलं सूर्यतो गर्भं वर्षार्त्तुषु भूतले।
तत्र लौकिकवार्त्तार्थं मही सस्यं प्रसूयते ॥७॥

तब पृथिवी एवं भगवान् आदित्य संगत होते हैं। ऋतुस्नाता पृथिवी वहाँ भास्कर से

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