साम्ब पुराण (श्री एस. एन. खण्डेलवाल हिन्दी व्याख्या सहित)
Samba Purana Hindi
महर्षि वेदव्यास (व्याख्याकार: श्री एस. एन. खण्डेलवाल) द्वारा
स्रोत: Sri Samba Purana with Hindi Commentary by Sri S. N. Khandelwal (उद्गम)
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संदर्भ में पढ़ेंअष्टादशोऽध्यायः ८९
अब मन्वन्तर की बात सुनो। याम्य, तुषित, वशवर्ती, सत्य, भूतरज, साध्यगण। उक्त मन्वन्तर समूह के १२-१२ देवता हैं। पारावत एवं तुषित गण के साथ अन्य साध्यगण हैं। साध्य देवताओं का नाम कहता हूँ; सुनो।।१५-१७।।
मनोऽनुमन्ता प्राणश्च नरो नारायणस्तथा।
वृत्तिस्तपो हयश्चैव हंसो धर्मश्च वीर्यवान् ॥१८॥
विष्णुश्चापि प्रभुश्चैव साध्या द्वादश कीर्त्तिताः।
एवं यज्ञभुजो देवा नित्यं यज्ञे प्रतिष्ठिताः ॥१९॥
अतीतान् वर्तमानांश्च पुनश्चैव निबोध मे।
आदित्या मरुतो रुद्राः कश्यपस्यात्मजाः स्मृताः ॥२०॥
मन, अनुमन्ता, प्राण, नर, नारायण, वृत्ति, तप, हय, हंस, वीर्यवान्, धर्म, विष्णु तथा प्रभु—ये १२ साध्य कहे गये हैं। यज्ञभुक् देवगण नित्य यज्ञ में प्रतिष्ठित हैं। अतीत एवं वर्तमान (देवगण की बात) मुझसे सुनो। आदित्यगण, मरुद्गण, रुद्रगण कश्यप के आत्मज हैं।।१८-२०।।
विश्वे च वसवः साध्या विज्ञेया धर्मसूनवः।
एवं धर्मसुतः सोमस्तृतीयो वसुरुच्यते ॥२१॥
धर्मोऽपि ब्रह्मणः पुत्रः पुराणे विश्रुतो मतः।
अथेन्द्रांश्च मनूंश्चैव नामभिस्तु निबोध मे ॥२२॥
विश्वेदेवगण, वसुगण तथा साध्यगण को धर्मपुत्ररूप से जानना चाहिये। इसी प्रकार से धर्मपुत्र सोम को तृतीय वसु कहा गया है। धर्म भी ब्रह्मा के पुत्र हैं। यह पुराण में कहा गया है। अब इन्द्रों का तथा मनुगण का नाम सुनो।।२१-२२।।
स्वायम्भुवो मनुः पूर्वं ततः स्वारोचिषः स्मृतः।
औत्तमिस्तामसश्चैव रैवतश्चाक्षुषस्तथा ॥२३॥
इत्येते षडतिक्रान्ताः सप्तमः साम्प्रतो मनुः।
वैवस्वत इति ज्ञेया भविष्याः सप्त चापरे ॥२४॥
तेषामाद्योऽर्कसावर्णिर्ब्रह्मसावर्णिरिव च।
तस्माच्च भवसावर्णिर्धर्मसावर्णिरित्यतः ॥२५॥
पञ्चमो दक्षसावर्णिः पञ्च सावर्णयः स्मृताः।
रौत्यो भौत्यश्च द्वावन्त्यावित्येते मनवः स्मृता ॥२६॥
प्रथम स्वायम्भुव मनु एवं तत्पश्चात् स्वरोचिष मनु प्रसिद्ध हैं। औत्तमि, तामस, रैवत तथा चाक्षुष—ये छः मनु अतिक्रान्त हो चुके हैं। सम्प्रति सप्तम मनु वैवस्वत हैं। तदनन्तर भविष्यत् के सात मनु हैं। उनमें प्रथम हैं—अर्कसावर्णि, ब्रह्मसावर्णि, भवसावर्णि,