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सम्पूर्ण चिकित्सा

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Sampoorna Chikitsa

राजीव दीक्षित / रोबिन बसराना (ऋषि वाग्भट्ट अष्टांगह्रदयम् आधारित) द्वारा

स्रोत: Hindi Ayurvedic Chikitsa based on Ashtanga Hridayam · Swadeshi Robin Basrana · 2018 (उद्गम)

DevanagariHindipublished115 पृष्ठ

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गौघृत में मनुष्य

शरीर में पहुँचे रोडियोधर्मी विकिरण का दुष्प्रभाव नष्ट करने की असीम क्षमता है। अग्नि में गाय का घी कि आहुति देने से उसका धुआँ जहाँ तक फैलता है, वहाँ तक का सारा वातावरण प्रदूषण और आण्विक विकरणों से मुक्त हो जाता है। सबसे आश्चर्यजनक बात तो यह है कि एक चम्मच गौघृत को अग्नि में डालने से एक टन प्राण वायु (ऑक्सीजन) बनती है जो अन्य किसी भी उपाय से संभव नहीं है।

देसी गाय के घी को रसायन कहा गया है। जो जवानी को कायम रखते हुए, बुढ़ापे को दूर रखता है। काली गाय का घी खाने से बुढ़ा व्यक्ति भी जवान जैसा हो जाता है। गाय के घी में स्वर्ण छार पाए जाते हैं जिसमें अद्भुत औषधीय गुण होते हैं, जो कि गाय के घी के अलावा अन्य घी में नहीं मिलते। गाय के घी में वैक्सीन एसिड, ब्यूट्रिक एसिड, बीटा-कैरोटीन जैसे माइक्रोन्यूट्री मौजूद होते हैं। जिस के सेवन करने से कैंसर जैसी गंभीर बीमारी से बचा जा सकता है। गाय के घी से उत्पन्न शरीर के माइक्रोन्यूट्री में कैंसर युक्त तत्वों से लड़ने की क्षमता होती है। यदि आप गाय के 10 ग्राम घी से हवन अनुष्ठान (यज्ञ) करते हैं तो इसके परिणाम स्वरूप वातावरण में लगभग 1 टन ताजा ऑक्सीजन का उत्पादन कर सकते हैं। यही कारण है कि मंदिरों में गाय के घी का दीपक जलाने कि तथा, धार्मिक समारोह में यज्ञ करने कि प्रथा प्रचलित है। इससे वातावरण में फैले परमाणु विकिरणों को हटाने की अद्भुत क्षमता होती है।

गाय के घी के अन्य महत्वपूर्ण उपयोग -

  • ➤ मासिक साव में किसी भी तरह की गड़बड़ी में 250 ग्राम गर्म पानी में (घी पिघला हो तो 3 चम्मच जमा हुआ हो तो 1 चम्मच) डालकर पीने से लाभ होगा। यह पानी मासिक साव वाले दिनों के दौरान ही पीना है।
  • ➤ गाय का घी नाक में डालने से एलर्जी खत्म हो जाती है, ये दुनिया की सारी दवाइयों से तेज असर दिखाता है।

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