सम्पूर्ण चिकित्सा
Sampoorna Chikitsa
राजीव दीक्षित / रोबिन बसराना (ऋषि वाग्भट्ट अष्टांगह्रदयम् आधारित) द्वारा
स्रोत: Hindi Ayurvedic Chikitsa based on Ashtanga Hridayam · Swadeshi Robin Basrana · 2018 (उद्गम)
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संदर्भ में पढ़ेंजब फेफड़ों में जकड़न एवं संकुचन होने के कारण साँस लेने में तकलीफ हो तो दमा की स्थिति कहलाती है। ज्यादातर यह रोग अधिक उम्र के लोगों को होता है। धूल और धुआँ भरे माहौल में रहने के कारण भी यह हो सकता है। प्रायः यह रोग अनुवांशिक होता है। अत्याधिक धूम्रपान करने वालों को भी यह रोग होता है। इसमें रोगी को साँस लेने में तकलीफ होती है यह तकलीफ कभी कम कभी ज्यादा घटती-बढ़ती रहती है। कभी-कभी खाँसी के साथ कफ निकलता है तो रोगी को आराम मिलता है। बलगम न निकले तो रोगी का हाल बेहाल हो जाता है।
- • तेजपात के पतों का चूर्ण अदरक के रस के साथ लेने से दमे में काफी लाभ होता है।
- • प्रातः काल खाली पेट 3-4 चम्मच अदरक का रस शहद के साथ लेने से काफी आराम मिलता है।
- • तुलसी के पतों के साथ 2-3 काली मिर्च चबाने से रोग में आराम मिलता है।
- • जब दमे का दौरा पड़े उस समय जरा सी फिटकरी जीभ पर रखकर चूसने से तुरंत आराम मिलता है।
- • लहसुन की कच्ची कली पर लौंग के तेल की दो-तीन बूंदे चबायें और गर्म पानी पीयें। दमा के दौरे नहीं पड़ेगे।
❖ नजला जुकाम
सामान्य रूप से ठंड लगने, या ठंडे पानी में चलने-फिरने से नजला-जुकाम हो जाता है। यह एक प्रकार का संक्रामक रोग है। जुकाम होने पर बार-बार छींके आती हैं और नाक से पानी आता है कभी-कभी बलगम भी आता है।
- • कच्चे लहसुन की 1-2 कली चबाकर खायें और पानी पीयें।
- • 10 पत्ते पुदीना और 6 दाने काली मिर्च और 1 चुटकी सेंधा नमक और 10 पत्ते तुलसी इन सबको मिलाकर काढ़ा बनायें तथा आधा पानी रह तने पर काढ़ा पिलाएं।
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