सम्पूर्ण चिकित्सा
Sampoorna Chikitsa
राजीव दीक्षित / रोबिन बसराना (ऋषि वाग्भट्ट अष्टांगह्रदयम् आधारित) द्वारा
स्रोत: Hindi Ayurvedic Chikitsa based on Ashtanga Hridayam · Swadeshi Robin Basrana · 2018 (उद्गम)
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संदर्भ में पढ़ेंएंजियोप्लास्टी ऑपरेशन करवाओ, और इस तरह आपको लाखो रूपये लूटता है और आपकी जिन्दगी इसी में निकल जाती है।
हमारे देश भारत में 3000 साल पहले एक बहुत बड़े ऋषि हुए थे उनका नाम था महाऋषि वागभट्ट जी।
वे कहते हैं कि कभी भी हृदय घात हो रहा है, मतलब दिल की नलियों में ब्लॉकिज होना शुरू हो रहा है तो इसका मतलब है कि रक्त(ब्लाड) में एसिडिटी(अम्लता) बढ़ी हुई है।
अम्लता दो तरह की होती है, एक होती है पेट की अम्लता और एक होती है रक्त की अम्लता।
आपके पेट में अम्लता जब बढ़ती है, तो आप कहेंगे पेट में जलन सी हो रही है, खट्टी-खट्टी डकार आ रही है। मुहँ से पानी निकल रहा है, और अगर ये अम्लता और बढ़ जाये तो हाइपर एसिडिटी होगी, और यही पेट की अम्लता बढ़ते-बढ़ते जब रक्त में आती है तो रक्त अम्लता (ब्लाड एसिडिटी) होती है।
और जब ब्लाड में एसिडिटी बढ़ती है तो ये अम्लीय रक्त दिल की नलियों में से निकल नहीं पाता, और नलियों में ब्लॉकिज कर देता है। तभी दिल का दौरा होता है। इसके बिना दिल का दौरा नहीं होता। और ये आयुर्वेद का सबसे बढ़ा सच है जिसको कोई डॉक्टर आपको बताता नहीं, क्योंकि इसका इलाज सबसे सरल है।
वागभट्ट जी लिखते हैं कि जब रक्त (ब्लाड) में अम्लता (एसिडिटी) बढ़ गई है। तो आप ऐसी चीजों का उपयोग करो जो क्षारीय हैं। आप जानते है दो तरह की चीजे होती हैं।
अम्लीय और क्षारीय (एसिड और एल्काइन)
अब अम्ल और क्षार को मिला दो तो न्यूट्रल(उदासीन) होती है सब जानते हैं।
तो वागभट्ट जी लिखते हैं कि रक्त की अम्लता बढ़ी हुई है तो क्षारीय(एल्काइन) चीजे खाओ। तो रक्त की अम्लता (एसिडिटी) न्यूट्रल
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