सम्पूर्ण चिकित्सा

सम्पूर्ण चिकित्सा
Sampoorna Chikitsa
राजीव दीक्षित / रोबिन बसराना (ऋषि वाग्भट्ट अष्टांगह्रदयम् आधारित) द्वारा
स्रोत: Hindi Ayurvedic Chikitsa based on Ashtanga Hridayam · Swadeshi Robin Basrana · 2018 (उद्गम)
DevanagariHindipublished115 पृष्ठ
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- ➤ गले से संबंधित विभिन्न लक्षण जैसे- गला खुशक होना, गले में दर्द, लार को निगलने की इच्छा, टॉसिल का भीतर तथा बाहर से सूज जाना और दर्द होना – मर्क सौल औषधि की 30 शक्ति का प्रयोजन करना चाहिए।
- ➤ मोटापे के लिए – ऐमोन-ब्रोम की 3X मात्रा, कैल्केरिया-कार्ब की 3 से 6 शक्ति तथा कैल्के आर्स की प्रति 2 ग्रेन मात्रा प्रत्येक 8 घंटे में सेवन करें।
❖ पेट के रोग
- ➤ पेट दर्द के लिए – ऐकोनाइट 30
- ➤ पेट के कीड़ों के लिए – स्टैनम 6 या 30
- ➤ पेट के सभी रोगों के लिए – नक्सवोमिका 30
❖ पुरुष रोग
- ➤ शरीर और मन की सुस्ती, शरीर कमजोर होना, जननेन्द्रिया की कमजोरी, स्वप्रदोष पीडित के लिए – एग्रस कैक्टस 6 शक्ति
- ➤ कामवासना पर नियंत्रण न रख पाना, हस्तमैथुन करने पर मजबूर होना – ओरिगैनम 3 शक्ति
- ➤ संभोग क्रिया में सफल न होना, नपुंसकता आ जाने पर – फास्पोरस 30 या 200 शक्ति
- ➤ नपुंसकता व वीर्यपात दूर करने के लिए – लाइकोपोडियम 30 या 200 या 1M
❖ चोट, मोच, फोड़ा तथा फुंसियां
- ➤ दाद से पीड़ित रोगी को बैसीलीनम औषधि की 30 शक्ति पहले एक सप्ताह तक सेवन करना चाहिए, इसके बाद इस औषधि की 200 शक्ति का प्रयोग सप्ताह में एक बार 4 सप्ताह तक करना चाहिए और फिर महीने में एक बार इस औषधि की 1M मात्रा का प्रयोग 5-6 महीने तक करना चाहिए। इस औषधि से
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