भारतकोश
सम्पूर्ण चिकित्सा

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Sampoorna Chikitsa

राजीव दीक्षित / रोबिन बसराना (ऋषि वाग्भट्ट अष्टांगह्रदयम् आधारित) द्वारा

स्रोत: Hindi Ayurvedic Chikitsa based on Ashtanga Hridayam · Swadeshi Robin Basrana · 2018 (उद्गम)

DevanagariHindipublished115 पृष्ठ

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  • ➤ मुँह की दुर्गंध दूर करने के लिए दोनों समय भोजन के बाद अथवा यदा-कदा सौफ़ चबाना चाहिए। इससे हाजमा भी दुरुस्त होता है।
    • ➤ नींबू को कच्चे दूध में निचोड़ कर, इसका लेप करके नहाये, पसीने की दुर्गन्ध दूर होगी।

स्त्रियों की समस्या अविकसित, बेडौल

वक्ष

  • ➤ स्त्री शरीर के लिए वक्ष-सौन्दर्य का विशेष महत्व है। सौन्दर्य की भी अपेक्षा माँ बनने और शिशु के स्वास्थ्य की दृष्टि से नारी शरीर में समुचित विकसित वक्ष का कहीं ज्यादा महत्व है। यूँ यौवनावस्था में कदम रखने के साथ ही स्तनों का भी समुचित विकास शुरू हो जाता है, परन्तु यदि किसी कारण से स्तन अविकसित रह जाएँ या अति विकसित होकर बेडौल हो जाएँ तो चिन्ता की बात हो जाती है।
  • ➤ स्तनों के अविकसित रह जाने के पीछे अत्याधिक दुबलापन, मासिक विकार, गर्भाशय की दिक्कतें, अधिक चिंता, तनाव जैसे अनेक कारण हो सकते हैं। इसी तरह शरीर पर मोटापा चढ़ने, आलसी जीवन बिताने, देर तक सोने की आदत, गरिष्ठ व ज्यादा भोजन करने अथवा समय से पूर्व अत्याधिक काम – क्रीड़ाओं में लिप्त होने, कामुक चिन्तन करने जैसे कारणों से भी स्तन अविकसित, बेडौल व ढीले हो सकते हैं। फिलहाल यहाँ नवयुवतियों की इस गंभीर समस्या का समाधान करने के लिए कुछ स्वदेशी उपाय सुझाए जा रहे हैं, जिन्हें आजमाकर अविकसित या बेडौल स्तनों को स्वस्थ, सुडौल बनाया जा सकता है। इतना अवश्य ध्यान रखें कि किसी भी बाह्य चिकित्सा को अपनाते हुए शरीर के आन्तरिक विकार अवश्य दूर करें।
  • ➤ कोई भी आंतरिक या बाह्य उपचार करते हुए स्तनों को समुचित विकास के लिए योगासन व व्यायाम अवश्य अपनाएं। स्तन

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