सम्पूर्ण चिकित्सा
Sampoorna Chikitsa
राजीव दीक्षित / रोबिन बसराना (ऋषि वाग्भट्ट अष्टांगह्रदयम् आधारित) द्वारा
स्रोत: Hindi Ayurvedic Chikitsa based on Ashtanga Hridayam · Swadeshi Robin Basrana · 2018 (उद्गम)
कान का बहना - सरसों के तेल में लौंग अथवा लहसुन अच्छी प्रकार से जलाकर कान में डालने से दर्द, मवाद बहना तथा सामान्य घाव ठीक हो जाता है ।
उत्तम तेजश्नी, बुद्धिमान, स्वरूपवान, स्वस्थ संतान हेतु गर्भिणी स्त्री का आहार का विषय में जाने
- 1. जब पता चले कि स्त्री को संतान सुख का सौभाग्य हो रहा है उसी दिन एक 100 मिली दूध आ जाये उतने माप की एक चांदी की कटोरी लाये, उसमें रात्रि में दूध डालकर दही जमाने रखे, प्रातः उठकर फ्रेश होकर खालीपेट वो दही खाये, याद रहे दही मधुर होना चाहिए अधिक खट्टा ना हो वो ध्यान रखे (मिठास उपर से कोई ना डाले) जिसदिन अधिक खट्टा लगे उस दिन ना खाएं।
फायदे - फोलिक एसिड, व कैल्शियम की गोलियां नहीं खानी पड़ती, ये प्रयोग गर्भाधान से तीसरे माह तक करें।
- 2. तीसरे माह से दही बंद करे और दही जमाकर हाथ बिलोना से बना ताजा मक्खन 15 से 20 ग्राम किसी के भी साथ खाए, रोटी के साथ, शक्कर के साथ, अथवा अकेला।
फायदे - हाथ बिलोने के मक्खन में विटामिन A भरपूर होता है जो दिमाग के लिए सर्वेत्तम आहार है, तीसरे माह से बच्चे के दिमाग का विकास शुरू होता है जिससे बालक बुद्धिमान होता है। ये प्रयोग तीसरे माह से 6 माह तक करें।
- 3. प्रतिदिन रात्रिभोजन के 40-50 मिनट बाद 1 ग्लास दूध में 5 ग्राम जितनी सोंठ डालकर पीये, मिठास के लिए शक्कर डाल सकते हैं।
फायदे - दूध शक्ति का भंडार है, गर्भिणी स्त्री को कमजोरी नहीं लगती, रक्तचाप ठीक रहता है और रक्त भी बनता है।
- 4. प्रातः 10 बजे के आसपास एक अथवा आधे अनार का जूस पिये,
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फायदे – हीमोग्लोबिन की गोलियां नहीं खानी पड़ती
सेब भी दिन में एक से आधा खाएं
बाकि शुद्ध आहार लीजिए
चौथा माह पूर्ण होते होते शिशु गर्भ में अपने होने की प्रतीति कराए कुछ हलचल करे तब से लेकर डिलीवरी तक रोज दिन में एकबार रामायण, कृष्ण बाल लीला, गीता अथवा कोई भी भगवान जिससे आप श्रद्धा रखते हो उसका भजन अथवा लेखन माध्यम स्वर में गाये, अथवा पढ़े जो बच्चे को सुनाई दे, जिससे बच्चा गर्भ से ही संस्कार सीखने लगेगा।
8 वा और 9 वा माह फिर चाँदी की कटोरी वाला दही शुरू करें, और रात्रि भोजन बाद जो दूध पीना है वो दूध में 1 चम्मच हाथ बिलोने से बना मक्खन को गर्म करके बनाया हुआ घी डालकर पीये जिससे बच्चा जल्द गर्भ से बाहर आता है और स्त्री को कष्ट कम देता है।
गर्भिणी स्त्री को आहार में अधिक मलालेदार, गर्म प्रकृति वाला आहार नहीं लेना है, रसोई में हमेशा सेंधा नमक ही खाये। उक्त आहार देने के बाद स्त्री को अन्य कोई गोलिया खाने की आवश्यकता नहीं है और ना ही बार बार अस्पताल जाने की। अस्पताल जाने पर डॉक्टर सोनोग्राफी करके डरा कर कोई भी दवाई खिलाना शुरू कर देगा, बार-बार सोनो ग्राफी से बच्चे के दिमाग पर विपरीत असर होता है।
बस इतना ध्यान रखने से संतान बुद्धिवान, सौन्दर्यवान, मजबूत शरीर वाली होगी और निरोगी भी रहेगी।
जहाँ जहाँ हमने दूध, दही, मक्खन घी लिखा है वो देशी गोमाता का ही होना चाहिए।
भैंस, जर्सी, HF का दूध दही मक्खन घी बिल्कुल नहीं चलेगा।
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