भारतकोश
सम्पूर्ण चाणक्य नीति एवं राजनीति सूत्र

सम्पूर्ण चाणक्य नीति एवं राजनीति सूत्र

Sampurna Chanakya Niti & Rajaniti Sutras

आचार्य चाणक्य (विष्णुगुप्त / कौटिल्य) द्वारा

DevanagariHindipublished196 पृष्ठ

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महत्त्वकांक्षा न रखने वाला राजा आलसी और अकर्मण्य होकर नष्ट हो जाता है। संकोच करने वाली वेश्या ग्राहकों को प्रसन्न न करने के कारण अपना धंधा चौपट कर लेती है और बेशर्म कुलीन स्त्री दूसरों की विषय-वासना का शिकार होकर पतित हो जाती है। किं कुलेन विशालेन विद्याहीनेन देहिनाम। दुष्कुलीनोऽपि विद्वांश्च देवैरपि सुपूज्यते॥ विद्याविहीन अर्थात मूर्ख व्यक्तियों के बड़े कुल के होने से क्या लाभ? विद्वान व्यक्ति का नीच कुल भी देवगणों से सम्मान पाता है।: 18।। विद्याविहीन व्यक्ति पशु के समान है। विद्वान व्यक्ति का ही महत्त्व है। विद्वान प्रशस्यते लोके विद्वान् गच्छति गौरवम्। विद्यया लभ्यते सर्वं विद्या सर्वत्र पूज्यते॥ संसार में विद्वान की ही प्रशंसा होती है, विद्वान व्यक्ति ही सभी जगह पूजे जाते हैं। विद्या से ही सब कुछ मिलता है, विद्या की सब जगह पूजा होती है।।19।। यश की प्राप्ति विद्या के द्वारा ही होती है। जो व्यक्ति जितना बड़ा विद्वान होगा, उसका सम्मान उतना ही ज्यादा होगा। मांसभक्षैः सुरापानैर्मूर्खैश्चाक्षरवर्जितैः। पशुभिः पुरुषाकारैर्भाराऽऽक्रान्ता च मेदिनी॥ जो व्यक्ति मांस और मदिरा का सेवन करते हैं, वे इस पृथ्वी पर बोझ हैं। इसी प्रकार जो व्यक्ति निरक्षर हैं, वे भी पृथ्वी पर बोझ हैं। इस प्रकार के मनुष्य रूपी पशुओं के भार से यह पृथ्वी हमेशा पीड़ित और दबी रहती है।।20।। CCO. Vasishtha Tripathi 101lection. Digitized by eGangotri