भारतकोश
सम्पूर्ण चाणक्य नीति एवं राजनीति सूत्र

सम्पूर्ण चाणक्य नीति एवं राजनीति सूत्र

Sampurna Chanakya Niti & Rajaniti Sutras

आचार्य चाणक्य (विष्णुगुप्त / कौटिल्य) द्वारा

DevanagariHindipublished196 पृष्ठ

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सामर्थ्य से बाहर का कोई काम पकड़ लेता है तो वह उसे पूरा नहीं कर पाता, तब वह बाद में पछताता है कि उसने अपने हाथ का काम छोड़कर दूसरे कार्य को क्यों पकड़ा। वरयेत् कुलजां प्राज्ञो विरूपामपि कन्यकाम्। रूपशीलां न नीचस्य विवाहः सदृशे कुले॥ बुद्धिहीन व्यक्ति को अच्छे कुल में जन्म लेने वाली कुरूप कन्या से भी विवाह कर लेना चाहिए, परंतु अच्छे रूप वाली नीच कुल की कन्या से विवाह नहीं करना चाहिए क्योंकि विवाह-संबंध समान कुल में ही श्रेष्ठ होता है।।14।। यहां चाणक्य ने विवाह संबंधों पर प्रकाश डालते हुए समाज को बताया है कि विवाह-संबंध समान स्तर और गुण वाले कुल में ही करने चाहिए। केवल रूप देखकर उसके पीछे नहीं भागना चाहिए। यह हो सकता है कि अच्छे रूप वाली युवती का पारिवारिक परिवेश उत्तम न हो, उसके संस्कार कुलीन अथवा श्रेष्ठ न हों। ऐसी पत्नी जीवन में विष घोलने का ही कार्य करती है। दूसरी ओर कम सुंदर युवती अच्छे संस्कारों में पली होने के कारण दाम्पत्य-जीवन को सुखमय स्वर्ग में परिवर्तित कर सकती है। अतः रूप देखकर नहीं, जीवन साथी के गुण, संस्कार और कुल की गरिमा को परखकर विवाह रचाना श्रेष्ठ होता है, परंतु आजकल युवक इस ओर ध्यान न देकर युवती के रूप पर ही आसक्त होते दिखाई पड़ते हैं। नखीनां च नदीनां च शृंगीणां शस्त्रपाणिनाम्। विश्वासो नैव कर्त्तव्यः स्त्रीषु राजकुलेषु च॥ लम्बे नाखून वाले हिंसक पशुओं, नदियों, बड़े-बड़े सींग वाले पशुओं, शस्त्रधारियों, स्त्रियों और राज-परिवारों का कभी विश्वास नहीं करना चाहिए।।15।। CC0. Vashishtha Tripathi Collection. Digitized by eGangotri