भारतकोश
सांख्य दर्शन (सांख्य-प्रवचन सूत्र व हिन्दी व्याख्या सहित)

सांख्य दर्शन (सांख्य-प्रवचन सूत्र व हिन्दी व्याख्या सहित)

Sankhya Darshana with Hindi Commentary

महर्षि कपिल द्वारा

स्रोत: चौखम्बा संस्कृत संस्थान · चौखम्बा संस्कृत संस्थान (उद्गम)

DevanagariSanskritpublished81 पृष्ठ

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( ४ ) [ २४ ] प्रकृति-विकृति- ( १ ) महत्तत्व ( २ ) अहंकार ( ३ ) शब्द ( ४ ) स्पर्श ( ५ ) रूप ( ६ ) रस, ( ७ ) गन्ध । [ २५ ] अप्रकृति-अविकृति- ( १ ) पुरुष । [ २६ ] भाव- ( १ ) धर्म ( २ ) अधर्म ( ३ ) ज्ञान ( ४ ) अज्ञान ( ५ ) वैराग्य ( ६ ) अवैराग्य ( ७ ) ऐश्वर्य्य (८) अनैश्वर्य्य । [ २७ ] बुद्धिका संक्षिप्त सर्ग [ सृष्टि ]-(१) विपर्यय ( २ ) अशक्ति ( ३ ) तुष्टि ( ४ ) सिद्धि । [ २८ ] बुद्धि का विस्तृत सर्ग- ८ विपर्यय, २८ अश- क्तियें, ६ तुष्टियें ८ सिद्धियें ( कुल ५० ) । व्याख्या (क) विपर्यय-(१) अविद्या (तम) (२) अस्मिता (मोह) (३) राग (महामोह) (४) द्वेष (तामिस्र) (५) अभिनिवेश (अन्ध- तामिस्र) । अविद्या या तम आदि के भेद । (अ) अविद्या के भेद-(१) अव्यक्त (२) महत्तत्व (३) अहं- कार (४) शब्द (५) स्पर्श (६) रूप (७) रस (८) गन्धतन्मात्र, इन आठ तत्वों में आत्म बुद्धिरूप अविद्या आठ प्रकार की होती है । (आ) अस्मिता के भेद-(१) अणिमा (२) लघिमा (३) गरिमा (४) महिमा (५) प्राप्ति (६) प्राकाम्य (७) वशित्व (८) ईशित्व । इन सिद्धियों की प्राप्ति से यह अभिमान होना कि-