भारतकोश
संस्कार विधि (महर्षि दयानन्द सरस्वती - षोडश वैदिक संस्कार एवं गुरुकुल विधान सटीक)

संस्कार विधि (महर्षि दयानन्द सरस्वती - षोडश वैदिक संस्कार एवं गुरुकुल विधान सटीक)

Sanskar Vidhi of Maharshi Dayananda Saraswati

महर्षि स्वामी दयानन्द सरस्वती द्वारा

DevanagariHindipublished318 पृष्ठ

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पृष्ठ 219

गृहाश्रमप्रकरणम् २१५ भग॒ प्रणे॑त॒र्भग॒ सत्य॑राधो॒ भगे॒मां धिय॒मुद॑वा॒ दद॑न्नः। भग॒ प्र णो॑ जनय॒ गोभि॒रश्वै॒र्भग॒ प्र नृभि॑र्नृ॒वन्तः॑ स्याम१॥३॥ उ॒तेदानीं॒ भग॑वन्तः स्याम॒ोत प्रपि॒त्व उ॒त म॒ध्ये अह्ना॑म्। उ॒तोदि॑ता मघव॒न्त्सूर्य॑स्य व॒यं दे॒वानां॑ सु॒मतौ स्या॑म२॥४॥ है, (यम्) जिस (भगम्) भजनीयस्वरूप को (चित्) भी (भक्षीति) इस प्रकार सेवन करता हूँ, और इसी प्रकार भगवान् परमेश्वर सबको (आह) उपदेश करता है कि तुम, जो मैं सूर्यादि जगत् को बनाने और धारण करनेहारा हूँ, उस मेरी उपासना किया, और मेरी आज्ञा में चला करो, जिससे तुम लोग सदा उन्नतिशील रहो, इससे (वयम्) हमलोग उसकी (हुवेम) स्तुति करते हैं॥२॥ १. हे (भग) भजनीयस्वरूप (प्रणेतः) सबके उत्पादक, सत्याचार में प्रेरक (भग) ऐश्वर्यप्रद (सत्यराधः) सत्य धन को देनेहारे (भग) सत्याचरण करनेहारों को ऐश्वर्यदाता आप परमेश्वर! (नः) हमको (इमाम्) इस (धियम्) प्रज्ञा को (ददत्) दीजिए, और उसके दान से हमारी (उदव) रक्षा कीजिए। हे (भग) आप (गोभिः) गाय आदि और (अश्वैः) घोड़े आदि उत्तम पशुओं के योग से राज्यश्री को (नः) हमारे लिए (प्रजनय) प्रकट कीजिए, हे (भग) आपकी कृपा से हम लोग (नृभिः) उत्तम मनुष्यों से (नृवन्तः) बहुत वीर मनुष्यवाले (प्र स्याम) अच्छे प्रकार होवें॥३॥ २. हे भगवन्! आपकी कृपा (उत) और अपने पुरुषार्थ से हम लोग (इदानीम्) इसी समय (प्रपित्वे) प्रकर्षता, उत्तमता की प्राप्ति में (उत) और (अह्नाम्) इन दिनों के (मध्ये) मध्य में (भगवन्तः) ऐश्वर्ययुक्त और शक्तिमान् (स्याम) होवें, (उत) और हे (मघवन्) परमपूजित असंख्य धन देनेहारे! (सूर्यस्य) सूर्यलोक के (उदिता) उदय में (देवानाम्) पूर्ण विद्वान्, धार्मिक, आप्त लोगों की (सुमतौ) अच्छी उत्तम प्रज्ञा (उत) और सुमति में (वयम्) हम लोग (स्याम) सदा प्रवृत्त रहें॥४॥