संस्कार विधि (महर्षि दयानन्द सरस्वती - षोडश वैदिक संस्कार एवं गुरुकुल विधान सटीक)

संस्कार विधि (महर्षि दयानन्द सरस्वती - षोडश वैदिक संस्कार एवं गुरुकुल विधान सटीक)
Sanskar Vidhi of Maharshi Dayananda Saraswati
महर्षि स्वामी दयानन्द सरस्वती द्वारा
DevanagariHindipublished318 पृष्ठ
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शान्तिकरणम् २१ सु॒षा॒र॒थिरश्वा॑निव॒ यन्म॑नु॒ष्या॒न्नेनी॒यते॒ऽभीशु॑भिर्वा॒जिन॑ इव। हृ॒त्प्रति॑ष्ठं॒ यद॒जिरं॒ जवि॑ष्ठं॒ तन्मे॒ मन॑: शि॒वस॑न्कल्पमस्तु ॥ २५ ॥ —यजुः० अ० ३४। मं० १-६॥ १ २ ३ २उ ३ १ २२ ३ १ २२ स॑ नः॒ पव॑स्व॒ शं गवे॒ शं जना॑य॒ शमर्व॑ते। १ २ ३ १ २ शं नो॒ राज॑न्नोष॑धीभ्यः ॥ २६ ॥ —साम० उत्तरा० प्रपा० १। मं० ३॥ अभ॑यं नः करत्यन्तरि॑क्षमभ॑यं द्यावा॑पृथि॒वी उ॒भे इ॒मे। अभ॑यं प॒श्चादभ॑यं पु॒रस्ता॑दुत्त॒रादध॑रादभ॑यं नो अस्तु ॥ २७ ॥ अभ॑यं मि॒त्रादभ॑यम॒मित्रा॒दभ॑यं ज्ञा॒तादभ॑यं पु॒रोक्षा॑त्। अभ॑यं नक्त॒मभ॑यं दिवा॑ नः॒ सर्वा॒ आशा॒ मम॑ मि॒त्रं भवन्तु ॥ २८ ॥ —अथर्व० कां० १९। सू० १५। मं० ५, ६ ॥ ॥ इति शान्तिकरणम् ॥