संस्कार विधि (महर्षि दयानन्द सरस्वती - षोडश वैदिक संस्कार एवं गुरुकुल विधान सटीक)
Sanskar Vidhi of Maharshi Dayananda Saraswati
महर्षि स्वामी दयानन्द सरस्वती द्वारा
पृष्ठ 309, कुल 318 में से
संदर्भ में पढ़ेंअन्त्येष्टिप्रकरणम् ३०५ य॒माय॒ मधु॑मत्तमं॒ राजे॑ ह॒व्यं जु॑होतन। इ॒दं नम॒ ऋषि॑भ्यः पूर्व॒जेभ्यः॒ पूर्वे॑भ्यः पथि॒कृद्भ्यः॒ स्वाहा॑ ॥ १६ ॥ —ऋ० म० १०। सू० १४॥ कृ॒ष्णः श्वे॒तौऽरु॑षो यामो अस्य ब्र॒ध्न ऋ॒ज्र उत॑ शो॒णो य॑श॒स्वान्। हिर॑ण्यरूपं॒ जनि॑ता जजान॒ स्वाहा॑ ॥ १७ ॥ —ऋ० म० १०। सू० २०। मं० ९॥ इन ऋग्वेद के मन्त्रों से चारों जने सत्रह आज्याहुति देकर, निम्नलिखित मन्त्रों से उसी प्रकार आहुति देवें— प्रा॒णेभ्यः॒ सार्धि॑पति॒केभ्यः॒ स्वाहा॑ ॥ १ ॥ पृ॒थि॒व्यै स्वाहा॑ ॥ २ ॥ अ॒ग्नये॒ स्वाहा॑ ॥ ३ ॥ अ॒न्तरि॑क्षाय॒ स्वाहा॑ ॥ ४ ॥ वा॒यवे॒ स्वाहा॑ ॥ ५ ॥ दि॒वे स्वाहा॑ ॥ ६ ॥ सूर्या॑य॒ स्वाहा॑ ॥ ७ ॥ दिग्भ्यः स्वाहा॑ ॥ ८ ॥ च॒न्द्राय॒ स्वाहा॑ ॥ ९ ॥ नक्ष॑त्रेभ्यः॒ स्वाहा॑ ॥ १० ॥ अ॒द्भ्यः॒ स्वाहा॑ ॥ ११ ॥ वरु॑णाय॒ स्वाहा॑ ॥ १२ ॥ ना॒भ्यै स्वाहा॑ ॥ १३ ॥ पू॒ताय॒ स्वाहा॑ ॥ १४ ॥ वा॒चे स्वाहा॑ ॥ १५ ॥ प्रा॒णाय॒ स्वाहा॑ ॥ १६ ॥ प्रा॒णाय॒ स्वाहा॑ ॥ १७ ॥ चक्षु॑षे स्वाहा॑ ॥ १८ ॥ चक्षु॑षे स्वाहा॑ ॥ १९ ॥ श्रोत्रा॑य॒ स्वाहा॑ ॥ २० ॥ श्रोत्रा॑य॒ स्वाहा॑ ॥ २१ ॥ लोम॑भ्यः॒ स्वाहा॑ ॥ २२ ॥ लोम॑भ्यः॒ स्वाहा॑ ॥ २३ ॥ त्व॒चे स्वाहा॑ ॥ २४ ॥ त्व॒चे स्वाहा॑ ॥ २५ ॥ लोहि॑ताय॒ स्वाहा॑ ॥ २६ ॥ लोहि॑ताय॒ स्वाहा॑ ॥ २७ ॥