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संस्कार विधि (महर्षि दयानन्द सरस्वती - षोडश वैदिक संस्कार एवं गुरुकुल विधान सटीक)

संस्कार विधि (महर्षि दयानन्द सरस्वती - षोडश वैदिक संस्कार एवं गुरुकुल विधान सटीक)

Sanskar Vidhi of Maharshi Dayananda Saraswati

महर्षि स्वामी दयानन्द सरस्वती द्वारा

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२८ संस्कारविधिः प्रणीता अं० १२ प्रोक्षणी अं० १२ अंगोछा २४ अं० लंबा अन्तर्धान १, अं० १२ खाँडा अंगुल २४ उत्तरारणी टुकड़ा १८ मूलेखात दृषद् उपवेश १, अं० २४ शूर्प समिध पलाश की १८ हस्तमात्र, इध्म परिधि ३ पलाश की बाहुमात्र। सामिधेनी समिद् प्रदेशमात्र। समीक्षण लेर ५। शाटी १। दृषदुपल १ दीर्घ अंगुल १२ पृ० ५३। उपल अंगुल ६। नेतु व्याम=हाथ ४, त्रिवृत् तृण वा गोबाल का। अथ ऋत्विग्वरणम् यजमानोक्तिः—'ओमावसोः सदने सीद'। इस मन्त्र का उच्चारण करके ऋत्विज् को कर्म कराने की इच्छा से स्वीकार करने के लिए प्रार्थना करे।