भारतकोश
संस्कार विधि (महर्षि दयानन्द सरस्वती - षोडश वैदिक संस्कार एवं गुरुकुल विधान सटीक)

संस्कार विधि (महर्षि दयानन्द सरस्वती - षोडश वैदिक संस्कार एवं गुरुकुल विधान सटीक)

Sanskar Vidhi of Maharshi Dayananda Saraswati

महर्षि स्वामी दयानन्द सरस्वती द्वारा

DevanagariHindipublished318 पृष्ठ

पृष्ठ 92, कुल 318 में से

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पृष्ठ 92

८८ संस्कारविधिः बालक को पिता अपने पास ले शुभासन पर पूर्वाभिमुख बैठके, पृष्ठ ३६-३७ में लिखे प्रमाणे सामवेद का महावामदेव्यगान करके बालक की माता स्त्रियों और बालक का पिता पुरुषों का यथा योग्य सत्कार करके विदा करें और जाते समय सब लोग तथा बालक के माता-पिता परमेश्वर का ध्यान करके— “ओम् त्वं जीव शरदः शतं वर्धमानः”॥ इस मन्त्र को बोल बालक को आशीर्वाद देके अपने- अपने घर को पधारें और बालक के माता-पिता प्रसन्न होकर बालक को प्रसन्न रक्खें॥ ॥ इति चूडाकर्मसंस्कारविधिः समाप्तः ॥

संस्कार विधि (महर्षि दयानन्द सरस्वती - षोडश वैदिक संस्कार एवं गुरुकुल विधान सटीक) · पृष्ठ 92, कुल 318 में से · BharatKosha