संतति शास्त्र
Santati Shastra
पं० अयोध्याप्रसाद भार्गव द्वारा
स्रोत: Santati - Shastra · काशी, भार्गव पुस्तकालय (उद्गम)
पृष्ठ 159, कुल 302 में से
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सन्तति-शास्त्र ।
दिन शुद्ध होनेपर तीन चार दिन पीछे रज पक जाता है। इसलिये रजोधर्मसे सात, आठ या दस दिन पीछे संयोग होने से पुत्र और रजोदर्शन से शुद्ध होनेपर उसी दिन या दूसरे तीसरे दिनोंके संयोगसे कन्या उत्पन्न होती है।
२ डाकूर सीक्स्टकी राय है कि पुरुषके दहिने अण्डसे निकला हुआ वीर्य स्त्रीके दहिने अण्डसे निकले रजके साथ मिलकर पुत्र और पुरुषकी वार्द्ध गोली अर्थात् अण्डसे निकला हुआ वीर्य स्त्रीके वार्द्ध अण्डसे निकले हुए रजके साथ मिलकर कन्या उत्पन्न करता है।
३ डाकूर वेल्हिग की राय है कि स्त्रीके दहिने अण्डसे पुत्र और वार्द्ध से कन्या उत्पन्न होती है। एक स्त्रीके नौ पुत्र हुए थे। उसके मर जानेपर गर्भाशयकी जाँचकी गई, तो मालूम हुआ कि इस स्त्रीके दहिनी ओरका अण्ड अच्छा था और वार्द्ध ओरका सूख कर सिकुड़ गया। इसलिये उसके लड़के ही हुए।
८ यूरोपियन विद्वानोंके जाँच
१. डाकूर क्लमेन के इलाजमे एक पेसा व्यक्ति था कि जिसके वार्द्ध अण्डमें चोट लग गई थी। वह अच्छा हो गया, परन्तु डाकूर महोदय को अण्डकोषके विंगड़ जानेका सन्देह रहा। इसके बाद उस व्यक्तिके जितनी सन्तानें हुईं वे सब पुत्र थे। मरने पर देखा गया, तो मालूम हुआ कि उसका वार्द्ध अण्ड किसी कामका नहीं था।
२. डाकूर वेल्हिगने इसी प्रकार एक स्त्री की जाँचकी