भारतकोश
संतति शास्त्र

संतति शास्त्र

Santati Shastra

पं० अयोध्याप्रसाद भार्गव द्वारा

स्रोत: Santati - Shastra · काशी, भार्गव पुस्तकालय (उद्गम)

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बच्चोंपर माता-पिताके मनोबलका प्रभाव । १६१

१. एक परिवारमें अच्छे खूबसूरत मोटे ताजे माता-पिता से जितने बच्चे हुए सब कुरूप और बुद्धिहीन थे जाँच करनेपर मालूम हुआ कि माता-पितामें अनबन रहती थी।

२. एक सुन्दर माता-पितासे जो पूरे जवान थे, डील डौल अच्छा था, उन्हें ठिगने कदकी सन्तान उत्पन्न हुई। जाँच करनेसे पता चला और खीने स्वीकार किया कि जब उस बच्चेका गर्भाधान हुआ था उस दिन स्त्री पुरुषमें लड़ाई हुई थी।

इन बातोंसे सिद्ध है कि सन्तानके विषयमें प्रेमका बहुत बड़ा महत्व है। जितने अंशोंमें माता-पिता प्रेम द्वारा मनसे एक हो जाते हैं उतने ही अंशोंमें बालक श्रेष्ठ होता है। माता-पिता के प्रेममें जब मनकी स्थिति अच्छी हालतमें रहती है तब बालक सुन्दर उत्पन्न होता है। प्रेमसे गर्भाधान समयमें माता-पिता अपने चित्तको जिसमें लगावेंगे उसी 'वातकी प्रेमी सन्तान उत्पन्न होगी। इसलिये जैसी सन्तान उत्पन्न करना हो माता-पिताको प्रेमसे अपने अपने मनको गर्भाधानके समय उसीमें लगाना चाहिये। इस प्रकार केवल प्रेम द्वारा ही उत्तम सन्तान उत्पन्न हो सकती है।

(३३) बच्चोंपर माता-पिताके मनोबलका प्रभाव ।

मानस शास्त्रके विद्वानोंका मत है कि सृष्टि मनसे उत्पन्न होती है। इसलिये मनचाही सन्तान पैदा करना मनकी ताकतके बाहर नहीं है। मनकी शक्तिको ही मानस-शक्ति मनःशक्ति,

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